बांदा। रेलवे स्टेशन में चल रही कैंटीन अगर कोई घटिया खाद्य या पेय सामग्री मिल जाए तो हैरत नहीं होनी चाहिए। यह कैंटीन अनाधिकृत रूप से चल रही है। ठेके का नवीनीकरण दो माह पूर्व खत्म हो चुका है, लेकिन रेलवे अधिकारियों की मिलीभगत से कैंटीन बेरोकटोक चल रही है। मुख्य कामर्शियल निरीक्षक का कहना है कि-आपका क्या जाता है? रेलवे को घाटा लगे या फायदा?
‘ए’ श्रेणी वाले रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर चल रही कैंटीन में बिस्कुट, पानी, लस्सी, दूध और छाछ आदि बिकता है। यह कैंटीन पेटी कांट्रेक्टर द्वारा चलाई जा रही है। नियम यह है कि हर तीन माह बाद ठेके का नवीनीकरण होना चाहिए, लेकिन यहां यह नियम रेल अफसरों के ठेंगे पर है।
दो माह पूर्व सितंबर में इसके नवीनीकरण की अवधि खत्म हो चुकी है। तब से इसका नवीनीकरण नहीं हुआ। बताते हैं कि कैंटीन में निर्धारित मूल्य से ज्यादा कीमत पर सामान बेचने पर सांसद ने शिकायत कर रखी है, इसीलिए नवीनीकरण नहीं हो रहा। लेकिन कैंटीन लगातार चल रही है। रोजाना हजारों की कमाई हो रही है।
कैंटीन संचालक अजय कुमार ने बताया कि सितंबर से नवीनीकरण नहीं किया गया, जबकि उसने सारी औपचारिकताएं पूरी कर रखी हैं। जरूरी अभिलेख यहां कार्यरत मुख्य कामर्शियल निरीक्षक (सीसीआई) संजय कुमार को सौंप दिए हैं।
उधर, सीसीआई से पूछे जाने पर वह भड़क उठे। मीडिया कर्मी को ही अनाधिकृत रूप से आने की बात कह कर जेल भेजवाने की धमकी दे डाली। यह भी कहा कि घाटा रेलवे का हो रहा है, इसमें आपका क्या जाता है?