मंडल कारागार में बुधवार को विचाराधीन बंदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के 48 घंटे बाद ही शुक्रवार को एक और बंदी की मौत हो गई। साथ में बंद मृतक के पुत्र ने जेल प्रशासन पर समय से जिला अस्पताल न भेजने का आरोप लगाया। मामले अफसरों के संज्ञान में आने के बाद तीन डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया।
चित्रकूट जिले के पहाड़ी थाना क्षेत्र के कहेटामाफी गांव निवासी रावेंद्र सिंह (55) पुत्र राजेंद्र सिंह और पुत्र धीरेंद्र सिंह के साथ लूट के मामले में 24 जून से मंडल कारागार के बैरिक नंबर-4 ए में बंद था। शुक्रवार को 5.40 बजे जेल के बंदी रक्षक रावेंद्र सिंह को जिला अस्पताल लाए। डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उसके सीने में दर्द (चेस्ट पेन) होना दर्ज किया गया।
पोस्टमार्टम हाउस में मृतक के चचेरे भाई राजा ने बताया कि सुबह उसके मोबाइल फोन पर जेलर ने रावेंद्र सिंह की मौत की सूचना दी। वह जेल पहुंचा तो पिता के साथ बंद पुत्र धीरेंद्र सिंह ने बताया कि उसे पिता के पास नहीं जाने दिया गया।
आरोप लगाया कि पिता की जेल में ही मौत हो गई थी। अस्पताल ले जाकर वहां मौत होने की खानापूरी की गई। 24 अगस्त को रावेंद्र को बाएं हाथ में दर्द होने पर जेल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत में सुधार न होने पर जिला अस्पताल रेफर करने की आरजू-मिन्नत करते रहे, लेकिन सुविधा शुल्क के बिना नहीं भेजा गया।
गौरतलब है कि बुधवार को तड़के बंदी मातादीन की जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम में उसकी मौत का कारण स्पष्ट न होने से बिसरा सुरक्षित रख लिया गया है। उधर, भाजपा जिलाध्यक्ष बालमुकुंद शुक्ला पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और मृतक के परिजनों से मिले।
उधर, जेलर एससी त्रिपाठी ने बताया कि सीने में दर्द, उल्टी और घबराहट की शिकायत पर जिला अस्पताल भेजा गया। जहां उसकी मौत हो गई। तीन डाक्टरों के पैनल ने शव का पोस्टमार्टम किया है। अब इसकी जांच डीआईजी व सीजेएम करेंगे। जेलर ने मृतक के पुत्र के आरोपों को गलत बताया।
डीआईजी, डीएम-एसपी जेल आए
मंडल कारागार में दो दिन के अंदर दो मौतों से प्रशासन व जेल अधिकारियों में हड़कंप मचा है। शुक्रवार को सुबह जिलाधिकारी सुरेश कुमार व एसपी राकेश शंकर ने जेल जाकर अफसरों से बंदी की मौत की जानकारी ली। डीआईजी जेल एसके श्रीवास्तव भी जेल पहुंचे और देर तक जेल अधिकारियों के साथ बातचीत की।