बांदा। खेत सूखने के बाद अब हलक सूखने के हालात बन
रहे हैं। सूखे के चलते चित्रकूटधाम मंडल में पानी की मारामारी होने लगी है।
भूजल स्तर गिरने से नलकूपों का पानी कम हो गया है।
सैकड़ों
हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है। बावजूद इसके जलसंस्थान मौजूदा समय
में मंडल के चारों जिलों में सिर्फ 10 एमएलडी पानी की कमी मान रहा है।
जल संस्थान के मुताबिक मंडल में 81 एमएलडी पानी की जरूरत है, जबकि 71 एमएलडी पानी उपलब्ध है। गर्मियों में यह अंतर और बढ़ जाएगा।
सूखे
के चलते मंडल के चारों जिलों में भूजल स्तर अप्रत्याशित ढंग से बेहद नीचे
चला गया है। ऐसे में चित्रकूटधाम मंडल में लगे जल संस्थान के सभी 228
नलकूपों का डिस्चार्ज बहुत कम हो गया है।
कई नलकूप तो बंद हो गए
हैं। पूरे मंडल में 1755 हैंडपंप हैं। इनमें से 526 हैंडपंप रिबोर के बाद
ही पानी दे सकेंगे। जमीनी हकीकत भले ही कुछ और हो, लेकिन जल संस्थान के
आंकड़ों में मंडल के चारों जिलों में सिर्फ 10 एमएलडी पानी ही कम आपूर्ति
हो रहा है।
जल संस्थान के मुताबिक 81 एमएलडी पानी की मांग है, जबकि
आपूर्ति 71 एमएलडी की जा रही है। बांदा में 20.28 एमएलडी मांग के सापेक्ष
17.23 एमएलडी, चित्रकूट में 36.31 के मुकाबले 25.08 एमएलडी, हमीरपुर में 26
एमएलडी के सापेक्ष 20 एमएलडी, महोबा में 93.32 के मुकाबले 80.54 एमएलडी
पानी उपलब्ध कराने का जल संस्थान दावा कर रहा है।
बबेरू में 15, बांदा में 30 फिट भूजल गिरा
बांदा।
पेयजल संकट गहराने की बात जल संस्थान अधिशासी अभियंता सुरेश चंद्र भी
स्वीकारते हैं। इसके लिए वे मुख्य वजह भूजल स्तर का तेजी से गिरना बताते
हैं।
अधिशासी अभियंता ने बताया कि सबसे खराब स्थित बबेरू टाउन
एरिया की है। वहां के आठ में से पांच नलकूपों ने पानी देना बंद कर दिया है।
यहां जल स्तर 100 से 115 फिट नीचे चला गया है।
बांदा शहर में भी
भूजल स्तर 100 फिट नीचे है। पहले यह 70 फिट पर था। 30 फिट जल स्तर घट गया
है। नतीजतन शहर में जलापूर्ति करने वाले सभी 25 नलकूपों का डिस्चार्ज घट
गया है।
गर्मी में संकट और बढ़ सकता है, इसलिए नलकूपों को रिबोर
कराकर 140 फिट तक कालम पाइप बढ़वा रहे हैं। बताया कि बबेरू में दो ट्यूबवेल
रिबोर कर चालू कर दिए गए हैं।