वन्य जीव सरकारी संपत्ति हैं। जंगली जानवरों की खरीद-फरोख्त भी नहीं की जा सकती। पशु विहार क्षेत्र में सक्षम अधिकारी की अनुमति के बगैर प्रवेश नहीं किया जा सकता। इस क्षेत्र में आग जलाना और हथियार ले जाने पर भी रोक है। ऐसी जानकारियां रविवार को वन कार्यालय परिसर में आयोजित प्रभाग स्तरीय कार्यशाला में दी गईं।
मंडल के चारों जनपदों से आए वन विभाग अधिकारियों और कर्मचारियों की एक दिवसीय कार्यशाला में उन्हें वनों से संबंधित विभिन्न एक्ट और कानून बताए गए। चित्रकूटधाम मंडल वन संरक्षक डा.केएल मीना ने वन अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने विभागीय दायित्व निभाने के तौर-तरीके बताए।
कहा कि वानिकी कार्यों में आम लोगों की भी सहभागिता ली जाए। चित्रकूट के डीएफओ बीके मिश्रा ने बुंदेलखंड पैकेज से बुंदेलखंड में आर्द्रता और भू-गर्भ जल स्तर बढ़ाकर हरितक्रांति लाने के उपाय बताए। महोबा के डीएफओ रमेशचंद्र ने वन और वन्य जीवों के प्रबंधन संबंधी टिप्स दिए।
अध्यक्षता कर रहे बांदा डीएफओ प्रमोद कुमार गुप्त ने वानिकी कार्यों में जीआईएस का प्रयोग और इसके महत्व को समझाया। जीपीएस सिस्टम से क्षेत्रफल और दूरी आंकलन के तरीके बताए। क्षेत्रीय वन अधिकारी टीएन सिंह ने वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की जानकारी दी।
कार्यशाला को क्षेत्रीय वनाधिकारी बीएम शुक्ल (मानिकपुर), नरेंद्र सिंह (कर्वी), हरी सिंह (पनवाड़ी), सीबी सिंह (पैलानी) आदि ने भी संबोधित किया। टीएन सिंह (बांदा) ने आभार जताया। सेक्शन आफीसर जुनैद अहमद आदि उपस्थित रहे।