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खाद के लिए किसान परेशान : पुलिस के बिना खाद बांटने से इनकार

Sun, 04 Jan 2015 11:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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चार दिनों की रिमझिम बारिश के बाद अब गेहूं की फसल के लिए यूरिया की जरूरत है लेकिन खाद के लिए किसान परेशान हैं। रविवार को मंडी समिति में किसानों का हुजूम उमड़ा। पुलिस फोर्स की व्यवस्था न होने पर केंद्र प्रभारी ने खाद वितरण कराने से हाथ खड़े कर दिए। दोपहर बाद तक किसान हंगामा काटते रहे। बाद में उन्हें बैरंग लौटना पड़ा।
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डीएपी के बाद अब यूरिया खाद का जबरदस्त संकट किसानों को झेलना पड़ रहा है। गेहूं की फसल के लिए यूरिया की जरूरत है लेकिन समितियों में ताले लटक रहे हैं। जहां तहां खुली समितियों में किसानों की लंबी कतारों में जूझना पड़ रहा है। यूरिया की 2600 एमटी खाद की रैक आने के बावजूद मारामारी कम नहीं हो रही है।

शनिवार को उड़ीसा से बांदा के लिए 1400 मीट्रिक टन और चित्रकूट के लिए 1300 एमटी खाद की रैक आई है, लेकिन किसानों तक नहीं पहुंच पा रही। मंडी परिषद में पीसीएफ, यूपी एग्रो और डीसीडीएफ के खाद बिक्री केंद्र हैं। लेकिन सिर्फ यूपी एग्रो को 100 एमटी खाद भेजी गई है।
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रविवार को सुबह से किसान मंडी स्थल पर जमा हो गए। यूपी एग्रो काउंटर से किसानों को पर्चियां भी बांटी गईं। लेकिन किसानों का बवाल बढ़ता देख प्रभारी ने खिड़की बंद कर किनारा पकड़ लिया। 

केंद्र प्रभारी नवल किशोर यादव ने कृषि विभाग के अफसरों और एआर को फोन से बवाल की सूचना दी, पर मौके पर कोई नहीं आया। अफसरों का फोन नहीं उठा। पुलिस फोर्स भेजने की बात पर सीओ सिटी विनोद सिंह ने बताया कि बारावफात पर्व पर फोर्स लगी है। उधर, दोपहर बाद तक हो-हल्ला करने के बाद किसान हताश होकर घर लौट गए।

पीसीएफ जिला प्रबंधक, परशुराम ने कहा, किसान सोसाइटियों के बजाए मंडी समिति पीसीएफ केंद्र पर भी लाइन लगा रहे हैं। इसलिए मंडी में पीसीएफ को खाद का वितरण नहीं किया गया। डीसीडीएफ के हिस्से की 50 एमटी खाद भी यूपी एग्रो को दी गई है। 100 एमटी खाद का स्टाक कम नहीं है। बिना पुलिस सहयोग के वितरण में दिक्कतें तो आती हैं।


20 रुपये ज्यादा वसूली, महंगी पड़ रही खाद
किसान इंद्रजीत (जारी), रामआसरे शुक्ला, संतोष सिंह, दादू, रामलखन, शिमरन महोखर आदि कहना था कि  मंडी परिषद स्थित तीन सेंटर हैं। जानबूझकर एक सेंटर में खाद की व्यवस्था की गई है जबकि डीसीडीएफ और पीसीएफ में भी खाद वितरण हो तो किसानों में खाद की मारामारी न हो।

किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्धारित कीमत से 20 रुपये ज्यादा वसूले जा रहे हैं। 334 रुपये की यूरिया की बोरी उन्हें खेत तक पहुंचाने में करीब हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
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