बांदा। यमुना और केन नदी का पानी तो कम हो रहा है लेकिन बारिश ने बाढ़ पीड़ितों की दुश्वारियां बढ़ा दी हैं। सोमवार को यमुना का जलस्तर दो मीटर घट गया, हालांकि पानी अभी भी खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर है। केन खतरे के निशान से एक मीटर नीचे आ गई है। इसके बाद भी पैलानी और बबेरू के 34 गांव अभी भी पानी से घिरे हैं।
कई गांवों में पानी भरने से सैकड़ों लोग घर बार छोड़कर खुले आसमान के नीचे पॉलीथिन तानकर गुजारा कर रहे हैं। गृहस्थी नष्ट होने से इनके पास न तो खाने-पीने की चीजें हैं और न बच्चों के लिए दूध। राशन किट भी गिनती के लोगों को मिली है। पैलानी और बबेरू तहसील में चल रही सामुदायिक रसोई का खाना भी पीड़ितों तक नहीं पहुंच रहा। कुछ तो सिर्फ लंच पैकेट के लिए 10 से 15 किलोमीटर का सफर कर मुख्यालय जा रहे हैं।
बच्चन का दूध तक निहाय
जसपुरा। यमुना के पानी से नांदादेव, शंकर पुरवा, अमारा, बरहेटा गांव के आधे से ज्यादा मकान जलमग्न हैं। मकान गिरने से गृहस्थी मिट्टी में दब गई है। खेत खलिहान में ग्रामीण पॉलिथीन तानकर पड़े हैं। नांदादेव की देवी, प्रताप, शिरोमणि ने बताया कि घर गिरने से खाने-पीने का सामान दब गया है। राम प्यारी का कहना है कि खेत मॉ परे हैं। न खाए का है न बच्चन के पिये का दूध है। गांव के कुछ लोगन आटा चाउर, नमक दीन है, वहीं खां रहे है। लेखपाल कहत है शिविर में चला तो सब मिली।
गजराज डेरा के रामलखन का कहना है कि लेखपाल आवत है एक दुई लोगन का राशन दैके फोटो खींच लेत हैं और चले जात हैं। आमारा गांव के प्रधान अशोक का कहना है कि यहां प्रशासन की ओर से कोई राशन किट या लंच पैकेट नहीं बांटे जा रहे है।
अब तो भूखन आए मरत हैं...
पैलानी। पैलानी डेरा, पंडवन डेरा, गुरगंवा, सिंधन गांव यमुना के पानी से चारों ओर से घिरे हैं। यहां 15 से 20 फीट पानी भरा है। लोग कगारों (भीट) के ऊपर तिरपाल डालकर पड़े है। गुरगवां की मैकी का कहना है यहां एक दरकी लेखपाल आओ है और कहत तै बाढ़ शिविर में चला। भइया घर गृहस्थी छोड़कर कैसे जान...। जो घर में घरों रहै वह खतम हुईगा। अब तो भूखन मरत है..। राशन, पानी की कमी है। सिंधन के सरजू का कहना है कि प्रशासन मदद नहीं कर रहा है। गिने चुने लोगन का राशन दैके चले जात हैं। पहले की बाढ़न में खाना मिलत रहो है या दरकी तो खाना तो दूर आटा भाटा भी नहीं देत। पडवन डेरा के श्यामा का कहना है प्रशासन कुछै नहीं दीन। कुछ नेता खाए पिए का सामान दैगे हैं। वह से लड़कन बच्चन का पेट भरा। बडे बुजुर्ग जो मिल गा तो खा लीन, नहीं तो भूखे पर रहे। मदद के नाम पर सबै दिखावा है।
रपटो पार पानी, आवागमन ठप
पैलानी तहसील के सिंधन के तुर्री नाला के रपटे में पानी भरने से लसडा गांव के चार मजरों का संपर्क टूट गया है। पडोहरा-नांदादेव संपर्क मार्ग पर पानी भरने से मडौली, पडोहरा का संपर्क टूट गया है। अमारा रपटा में पानी भरने व बरेहटा-अमारा संपर्क मार्ग कटने से कई गांवों का संपर्क अन्य गांवों से कट गया है। नरी पलरा रपटा, मरझा मार्ग, खजुरी रपटा में पानी भरने से 20 गांव व मजरों का संपर्क कट गया है।
बबेरू तहसील के गडरा बसरा नाला, इटरा-बडौनी संपर्क मार्ग, बसरा नाला, गडरा नाला, औगासी-बाकल संपर्क मार्ग, झाीर नाला, कुंडरी नाला, बंधवा नाला, मऊ से कमासिन संपर्क मार्ग, मऊ-कमासिन संपर्क मार्ग कालीन नाला के रपटे के ऊपर से पानी बहने से कई गांवों का संपर्क कट गया है। सदर तहसील के बेंदा, बेदा घाट संपर्क मार्ग, माचा-लोहारी संपर्क मार्ग में पानी भरने से 13 गांव व मजरों का संपर्क अन्य गांव व मुख्यालय से कट गया है। हालांकि प्रशासन ने नावें लगा दी है।
इनसेट-
वितरित की सिर्फ 600 राशन किट
दैवी आपदा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक बाढ़ से हजारों लोग प्रभावित हैं। अब तक 600 राशन किट का वितरण किया गया। प्रभारी मंत्री नंद गोपाल नंदी के आने की सूचना के बाद 500 राशन किट वितरण के लिए और मंगाई गई है। राजस्व अधिकारियों का कहना है कि राशन किट वितरण में फोटो का झमेला आड़े आ रहा है। शासन के आदेश है कि जिसे किट दें, उसकी मौके की फोटो अपलोड की जाए। ऐसे में समय जाया हो रहा है। दिनभर में बमुश्किल 100 किट ही वितरित हो पा रही है। दूसरा किट का वितरण सिर्फ राहत कैंप के लोगों को ही किया जाएगा।
बाढ राहत राशन किट में सामान
- बाढ राहत राशन किट में 10-10 किलो आटा, चावल, अरहर दाल दो किलो, आलू 10 किलो, हल्दी 200 ग्राम, मिर्च 100 ग्राम, सब्जी मसाला 200 ग्राम, सरसों का तेल एक लीटर, नमक एक किलो, सैनिटरी पैड 20, साबुन कपडे का दो, तौलिया एक, मग एक।
राहत शिविर में यह है खाने का मेन्यू
राहत शिविर में सुबह नाश्ता दिया जाना चाहिए जिसमें दलिया, उबला चना, पोहा, मौसमी फल, 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों और 60 साल से अधिक के लोगों को एक गिलास दूध। दोपहर को खाने में सब्जी, दाल, चावल, रोटी। रात में सब्जी, रोटी या पूड़ी दी जानी चाहिए लेकिन प्रशासन अपने ही मेन्यू का पालन नहीं कर रहा है। सिर्फ लाई, चना ही बांटा रहा है। 24 घंटे में एक बार पूडी सब्जी दी जा रही है। कभी-कभी तो पूड़ी सब्जी के लिए प्रभावितों को खुद तहसील जाना पड़ता है।
यहां करे शिकायत
- प्रशासन ने बाढ़ नियंत्रण कक्ष खोला है, जिसका नंबर 285260 है। टोल फ्री नंबर 1077 है। कार्रवाई न होने पर जिला आपदा विशेषज्ञ डाॅ. प्रभाकर सिंह को मो. नंबर 9452662412 पर फोन करें या फिर एडीएम व प्रभारी अधिकारी दैवी आपदा के बेसिक फोन नंबर 224462 पर फोन करें।
वर्जन...
अधिकारियों को आदेश दिए गए हैं कि चाहे कैंप में हों या खुले में, जरूरतमंद को राशन व लंच पैकेट दिए जाएं। किसी भी तरह की दिक्कत होने पर टोल फ्री नंबर पर शिकायत करें। तत्काल निस्तारण किया जाएगा।- जे.रीभा, जिलाधिकारी, बांदा।
राशन वितरण में भेदभाव
बांदा। सपा के राष्ट्रीय महासचिव विशंभर प्रसाद निषाद ने बताया कि बाढ़ से घिरे गांवों तक राशन नहीं पहुंच रहा है। जहां पहुंच रहा है वहां पर भेदभाव किया जा रहा है। सरकारी सामग्री अधिकारियों से न बंटवाकर भाजपा के तथाकथित नेताओं द्वारा बंटवाई जा रही है। सरकारी सहायता राशि बांटकर वाहवाही लूटी जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग के 19 सचल दल गठित, तीन हॉट स्टाप पर 24 घंटे एंबुलेंस सेवा
बांदा। स्वास्थ्य विभाग ने जिले की 43 बाढ़ राहत चौकियों पर प्रत्येक में तीन स्वास्थ्य कर्मी तैनात किए गए हैं। इसके अलावा 19 सचल दल गठित किए हैं। प्रत्येक सचल दल में एक डॉक्टर, फार्मासिस्ट और वार्डबॉय की तैनाती की है।
सीएमओ डॉ. विजेंद्र सिंह ने बताया कि बाढ़ राहत के लिए तीन हाॅट स्टाप बनाए गए हैं। यहां 24 घंटे एंबुलेंस रहती है। हाॅट स्टाप मरका, खुरहंड और पैलानी में बने हैं। प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र में एक कंट्रोल रूम बनाया गया है। बताया कि स्टाक में 4500 किलोग्राम ब्लीचिंग पाउडर, एक लाख 78 हजार ओआरएस घोल, एक लाख क्लोरीन की गोलियां, 2102 वायल एंटीवेनम और 468 एंटी रैबीज वायल उपलब्ध है। कलक्ट्रेट में बने कंट्रोल रूम से सूचना मिलने पर टीम बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का भ्रमण कर वहां ब्लीचिंग पाउडर के इस्तेमाल, दवाओं का वितरण आदि का कार्य करती है।