जिला अस्पताल मेें भर्ती लावारिस साधु की सेवा करते अस्पताल कर्मचारी सुशील कुमार।
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बांदा। मरीजों के साथ इलाज में लापरवाही पर जिला अस्पताल में हंगामे तो आए दिन होते हैं, पर कभी यहां कुछ दुर्लभ दृश्य भी नजर जाते हैं। जिसे देखकर महसूस होता है कि अस्पताल कर्मियों में अभी मानवता पूरी तरह मरी नहीं है। ऐसी एक ताजी बानगी अस्पताल के कर्मचारी (वार्ड ब्वाय) सुशील कुमार दीक्षित ने पेश की है।
16 जून को चित्रकूट स्थित रामजानकीकुंड आश्रम के कुछ लोग लगभग 75 वर्षीय वृद्ध साधु को जिला अस्पताल के बाहर छोड़कर चले गए। साधु की हालत गंभीर थी। पैर में रोग होने से वह चल फिर भी नहीं पा रहा था।
कुछ लोगों की पहल पर सीएमएस ने साधु को भर्ती वार्ड में बेड आवंटित कर दिया। तब से उसका इलाज चल रहा है लेकिन बीमार साधु की तीमारदारी के लिए कोई नहीं था। खिलाने-पिलाने, नित्य क्रिया कराने से लेकर दवा देने के लिए तीमारदार की दरकार थी।
साधु बाबूराम पर अस्पताल के वार्ड ब्वाय सुशील कुमार दीक्षित पसीज गए। अस्पताल की तमाम ड्यूटी की जिम्मेदारी के साथ साधु की सेवा भी अपने जिम्मे ले ली। कई दिनों से सुशील बेसहारा साधु की तीमारदारी कर रहे हैं।
अन्य कर्मचारी, मरीज और तीमारदार साधु के प्रति ‘सुशील’ व्यवहार पर सुशील कुमार दीक्षित की सराहना कर रहे हैं। सुशील का कहना है कि उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है जैसे वे पिता की सेवा कर रहे हैं।