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अघोषित बिजली कटौती से कराह रहे ग्रामीण

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अतर्रा/तिंदवारी। ग्रामीण क्षेत्रों में अघोषित बिजली कटौती से लोग बेहाल हैँ। अतर्रा में नौ से 10 घंटे की बिजली कटौती से उमस भरी गर्मी में लोग परेशान हैं। रात के अंधेरे में जहरीले कीड़ों और ऊबड़-खाबड़ गलियों में दुर्घटना का खतरा बना हुआ है।
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ग्रामीणों का कहना है कि बिसंडा फीडर से पुनाहुर, सिकलोढ़ी, भूरी, गड़ांव, महोतरा, सेमरिया, थनैल, कैरी, कोर्रा, पवई सहित करीब आधा सैकड़ा से अधिक गांव व पुरवों को बिजली की आपूर्ति होती है।
मनोज गौतम, बालेंद्र तिवारी, राजकुमार, ब्रजेंद्र गौतम, विनोद द्विवेदी, पिंकू तिवारी, राजू, पंकज गौतम, अखिलेश, अंकुर गौतम, गंगा आदि ने बताया कि पिछले एक पखवाड़े से कटौती से लोग खासे परेशान हैं। शाम को सात बजे गई बिजली आधी रात तक नहीं आती है।
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इसी तरह अतर्रा रूरल फीडर के बंद रहने से अतर्रा ग्रामीण सहित मजरों में अंधेरा छाया रहता है। मच्छरों से रात की नींद हराम है। बिसंडा के जेई अनुदेश का कहना है कि पनकी से बिजली न मिलने से यह दिक्कत आ रही है।
एसडीओ ज्ञानेश कुमार ने कहा कि शासन की नीतियों के अनुसार गांवों को बिजली मुहैया कराई जाएगी। तिंदवारी में रोजाना 10 से 11 घंटे की अघोषित कटौती की जा रही है। बिजली न मिलने से किसान धान की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। रात के समय बिजली जाने से लोग परेशान हैं। जलापूर्ति प्रभावित हो रही है।
खप्टिहा कलां कस्बा समेत आसपास के क्षेत्रों में 10 घंटे की बिजली कटौती की जा रही है। ग्रामीणों ने रोष जताया कि जेई निर्मल कुशवाहा फोन नहीं उठाते। दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के टोल फ्री नंबर पर उपभोक्ता से कनेक्शन नंबर पूछ कर टाल दिया जाता है।
133 केवी विद्युत उप केंद्र में बिजली की आपूर्ति की जाती है। बमुश्किल 24 घंटे में 12 से 14 घंटे ही बिजली मिल रही है। बरसात के मौसम में जहरीले कीड़ों का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों ने विद्युत विभाग के मुख्य अभियंता को पत्र भेजकर विद्युत कटौती में सुधार की मांग की है।
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