मदद को एक साथ कई हाथ आगे बढ़े तो दैवी आपदा पीड़ित किसान की बेटी के हाथ पीले हो गए। गांव वालों ने सारा इंतजाम खुद संभाला और बेहद सादे समारोह में शादी की सभी रस्में निभाई गईं। शादी में न हलवाई बुलाए गए और न तंबू तना था। बारातियों के लिए गांव के घरों से भोजन आया।
नरैनी तहसील के चौबे का पुरवा (गहबरा) गांव में किसान शिवदयाल तीन बीघा का काश्तकार हैं। 15 बीघा जमीन बटाई पर ले रखी थी। अच्छी फसल की उम्मीद से शिवदयाल ने अपनी बेटी सुनीता की शादी सुदिनपुर (चित्रकूट) के वीरेंद्र द्विवेदी के साथ पिछले वर्ष तय कर दी थी।
9 मई को बारात का दिन तय था, लेकिन ओला और बारिश ने फसल के साथ उसकी उम्मीदें भी मिट्टी में मिला दीं। बिना पैसे के बेटी का तय हो चुका रिश्ता टूटने की कगार पर पहुंच गया। शिवदयाल पर एक लाख रुपये का बैंक कर्ज भी है। शिवदयाल की इस परेशानी को गांव के कुछ संवेदनशील लोगों ने भांप लिया।
तेज बहादुर सिंह, देव सिंह, विशाली, रामस्वरूप, मास्टर तिवारी और विद्याधाम समिति के सचिव राजा भइया मदद को आगे आए। सभी ने परेशान किसान की बेटी के हाथ पीले करने की ठानी। शनिवार (9 मई) को सुनीता की बारात आई। इससे पहले गांव वालों ने सारा जिम्मा खुद संभाल लिया।
बेहद सादे समारोह में छिऊल के पत्तों से पंडाल सजाया गया। हर घर से भोजन का इंतजाम कराकर बारातियों को परोसा गया। पूरे गांव ने एकजुट होकर बारातियों की अगुवानी की। रविवार को गांव वालों ने नम आंखों के बीच सुनीता को विदाई दी। पुलिस क्षेत्राधिकारी अरुण कुमार और वरिष्ठ अधिवक्ता व सपा नेता द्वारिकेश सिंह मंडेला भी शादी में शरीक रहे।