बदौसा। डाकुओं की दहशत से जो विद्यालय कभी वीरान रहा करते थे, अब वहां का नजारा बदला हुआ है। दस्यु प्रभावित क्षेत्र में यह बदलाव कायाकल्प योजना की देन है। सुविधाएं बढ़ीं तो बच्चों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। विद्यालय भवन आकर्षक रूप ले चुका है। कुछेक काम बाकी हैं।
फतेहगंज थाना क्षेत्र दस्यु प्रभावित रहा है। यहां ददुआ, ठोकिया सहित कई दस्यु सरगना सक्रिय रहे हैं। नतीजे में इन डकैतों के मारे जाने के पूर्व तक यहां के स्कूल वीरान रहते थे। न शिक्षक जाते थे, न बालक-बालिकाएं स्कूल पढ़ने आते थे। कई गांवों के स्कूलों में तो आसपास के लोग बागवानी करने लगे थे। कुछ स्कूल भवनों को ग्रामीणों ने अपनी फसल रखने का अड्डा बना लिया था। डकैतों के सफाए के बाद माहौल बदलने की शुरुआत हुई। अब कायाकल्प योजना ने इन स्कूलों की और कायापलट कर दी। दुबरिया गांव का उच्च प्राथमिक विद्यालय इसकी बानगी है। कायाकल्प के 14 बिंदुओं में ज्यादातर पर काम हो चुका है। विद्यालय में 55 छात्राएं और 37 छात्र हैं। प्रधानाचार्य सहित सात अध्यापक हैं।
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कायाकल्प से स्कूल में हुए सुधार---
बालक-बालिकाओं का अलग-अलग शौचालय (रनिंग वाटर व सफाई सहित), हैंडवॉशिंग यूनिट, कक्षाओं में टॉइल्स, श्यामपट, परिसर में दिव्यांग सुलभ रैंप, बिजली का कनेक्शन, कक्षाओं में वायरिंग व विद्युत उपकरण, शुद्ध पेयजल के लिए टंकी, दीवारों पर आकर्षक वाल पेंटिंग।
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शेष/अधूरे काम---
विद्यालय परिसर की बाउंड्री का निर्माण पूरा नहीं हुआ। रसोईघर में रंगाई-पुताई नहीं है।
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फोटो परिचय-23-रमेशचंद्र राजपूत
कायाकल्प योजना से विद्यालय में लगभग सभी मानक पूरे कर लिए गए हैं। बाउंड्री निर्माणाधीन है। प्रधानाचार्य योगाचार्य भी हैं। बच्चों को योगा भी सिखाते हैं और उन्हें इसके लिए राज्यपाल और मुख्यमंत्री से पुरस्कार भी मिल चुका है।
-रमेशचंद्र राजपूत, प्रधानाचार्य, उच्च प्राथमिक स्कूल, दुबरिया गांव
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फोटो परिचय-21-अंबिका प्रसाद
घर से अच्छा लगता है स्कूल
कायाकल्प ने विद्यालय को हमारे घर से भी अच्छा बना दिया। यहां हमें साफ-सुथरी कक्ष, टॉइल्स की फर्श और गर्मी में सीलिंग फैन तथा शुद्ध पेयजल मिल रहा है। अब स्कूल में अच्छा लगता है।
-अंबिका प्रसाद, छात्र
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फोटो परिचय-22-सुशीला
गैरहाजिर रहने को नहीं करता मन
साफ-सुथरा माहौल, पीने का पानी और गर्मी से बचने को पंखे, रंगाई-पुताई व साज-सज्जा से पढ़ाई में खूब मन लगता है। स्कूल से गैरहाजिर रहने को मन नहीं करता। ऐसी कायाकल्प तो हमने सोची भी नहीं थी।
सुशीला, छात्रा