बदौसा। रसिन बांध परियोजना से आसपास के 17 गांवों को पर्याप्त पानी मिल पा रहा है या नहीं, लेकिन बांध के लिए बेघर हुए गरीब ग्रामीणों और आदिवासियों को दो दशक बाद भी स्थायी आशियाना नहीं मिला। सिंचाई विभाग द्वारा दी गई टिन की झोपड़ी में दिन गुजार रहे हैं।
ब्यूर गांव के लगभग 76 घरों को बांध क्षेत्र में लेकर खाली करा लिया गया था। सिंचाई विभाग ने इन मजदूर परिवारों को आशियाना के सब्जबाग दिखाए थे, लेकिन सुनसान जंगल में मात्र 150 वर्ग मीटर भूमि और निर्माण के लिए सिर्फ 10 हजार रुपये तथा 8 अदद टिन की चादर देकर पल्ला झाड़ लिया। यह राहत भी मात्र आधे विस्थापितों को मिली। विस्थापित किए गए मजदूर भाईराम, विनोद आदि ने बताया कि उन्हें अब तक कुछ नहीं मिला है। विजय, तेजीलाल, बुद्धन, रामबाबू आदि ने बताया कि सिर्फ जमीन का टुकड़ा दे दिया गया।
कहा कि निर्माण कहां से कराएं। गांव के विजय बहादुर और उसका भतीजा सुरेंद्र बताते हैं कि आवासीय भूमि की मांग के लिए उन्होंने अनशन किया था। अफसरों ने सब्जबाग दिखाकर खामोशी धारण कर ली। वह खुले आसमान तले जीवन गुजार रहे हैं। कुछ लोगों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण ली है। अतिवृद्ध तिजिया भी विस्थापितों में शामिल हैं। उसे आज भी अपने छिन गए घर के बदले में सिर छिपाने की जगह की तलाश है। (संवाद)
इंसेट---
रसिन बांध परियोजना---
स्वीकृत लागत-14,164 लाख
जारी हुई राशि-12,091 लाख
खर्च राशि-11,669 लाख
कार्यदाई संस्था-सिंचाई निर्माण खंड, चित्रकूट।
नहर की लंबाई-24.10 किलोमीटर
नदी जिस पर बांध बना है-बानगंगा
परियोजना निर्माण की शुरुआत-वर्ष 2002-03
लाभान्वित होने वाले गांव-17 (रसिन, सुदिनपुर, दुबरिया, तरसूमा, फाटा पुरवा, भड़िहाई, महादेवन, मलखू पुरवा, श्यामाडांड़, तमरार, नागर पुरवा, जोगिया पुरवा, बरछा-ब, भुसासी, बदौसा, माधव ताला, शहजादपुर। रसिन बांध परियोजना को उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री सिंचाई परियोजना में शामिल कर लिया है।
इंसेट---
बोले अभियंता---
रसिन बांध का कार्य देख रहे सिंचाई विभाग, चित्रकूट के अवर अभियंता एसपी सिंह का कहना है कि विस्थापितों को केवल जमीन देने की बात तय हुई थी, लेकिन फिर भी उनकी मजबूरी को देखते हुए निर्माण के लिए कुछ मजदूरी और टिन की चादर भी दे दी गईं। किसी तरह की वादाखिलाफी या उपेक्षा नहीं की गई।
इंसेट---
फोटो परिचय-11-रसिन बांध स्थल पर सिंचाई विभाग का वीरान पड़ा रहने वाला डाक बंगला मुख्यमंत्री की आमद से पूर्व रंगरोगन से संवारा गया।
इंसेट---
फोटो परिचय-12-रसिन बांध से निकली सूखी पड़ी मुख्य नहर की घासफूस साफ करते मजदूर।