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बेदर्द बेरोजगारी ने पकड़वा दिया फावड़ा

Sat, 04 Mar 2017 12:16 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा
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मनरेगा - फोटो : प्रतीकात्मक फोटो
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बुंदेलखंड में दैवी आपदा और बेरोजगारी ने शिक्षित युवाओं को फावड़े थामने को मजबूर कर दिया। इंटर से लेकर स्नातक व परास्नातक तक डिग्री फिर भी नौकरी की तलाश नहीं हुई पूरी। कोई प्राइवेट जॉब भी न मिलने से हताश 18 से 30 साल के शिक्षित युवा ग्राम पंचायतों के कामों में पसीना बहा रहे हैं। चित्रकूटधाम मंडल में ऐसे 1.46 लाख युवाओं ने पिछले तीन सालों में मनरेगा के जॉबकार्ड बनवाए। प्रधानों से रोजगार की मांग कर तालाब व सड़कों आदि की खुदाई में बेझिझक काम किया।
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चित्रकूटधाम मंडल में करीब 17 लाख मजदूर जॉब कार्डधारक हैं। ये महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना में काम कर रहे हैं। इनमें हर आयु वर्ग के महिला व पुरुष श्रमिक हैं। पिछले तीन सालों में युवा मजदूरों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है। इसकी वजह यह है कि बुंदेलखंड में पिछले तीन सालों से कभी सूखा तो कभी बाढ़ या कभी ओलावृष्टि का सामना करना पड़ रहा है। खासकर चित्रकूटधाम मंडल में न कोई बड़ा कारखाना है और न ही उद्योग।

उधर, दैवी आपदा से युवाओं के घर के हालात भी बिगड़े और उन्हें रोजगार की सख्त जरूरत पड़ी। पढ़ाई-लिखाई पूरी होने पर रोजगार की तलाश की। सेवायोजन कार्यालय में पंजीयन कराया। लेकिन हर जगह मायूसी मिली। थक हारकर युवाओं ने प्रधानों से मिलकर जॉबकार्ड बनवाया और मनरेगा योजना के कार्यों में फावड़ा थाम लिया। चित्रकूटधाम मंडल में बांदा में कुल 6 लाख मनरेगा मजदूर हैं। इनमें पढ़े लिखे (इंटर से स्नातक तक) 18 से 30 साल आयु वर्ग के युवाओं की संख्या 54,768 है।
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हमीरपुर जनपद में 4,22,042 जाबकार्ड धारकों में 37,718 शिक्षित बेरोजगार युवा हैं। महोबा जिले में कुल 3,29,792 मनरेगा श्रमिकों में 36,129 युवा व पढ़े लिखे हैं। चित्रकूट जनपद में 3,48,661 श्रमिकों ने जॉब कार्ड बनवाएं और मनरेगा का काम कर रहे हैं। इनमें 36,061 ऐसे युवा मजदूर हैं जिन्होंने इंटर से लेकर स्नातक व परास्नातक तक की डिग्री हासिल कर रखी है। हालात से मजबूर होकर और अपना खुद का खर्च चलाने के लिए तालाबों व सड़कों में काम कर रहे हैं।

ग्राम प्रधान कुरौली रामभवन यादव ने कहा कि उनकी ग्राम पंचायतों में करीब 60-70 शिक्षित युवा बेरोजगार ऐसे हैं, जिन्होंने पिछले दो तीन सालों में जॉबकार्ड बनवाए हैं। पहले तो उन्हें लगा कि ये पढ़ने-लिखने वाले लोग कैसे काम करेंगे, लेकिन अब वे नियमित काम कर रहे हैं। उनका प्रयास यह रहता है कि इन पढ़े-लिखे युवा मजदूरों को समय से मजदूरी मिले। उपायुक्त श्रम एवं रोजगार विकास मिश्रा ने कहा मनरेगा मजदूर में शिक्षित युवाओं की संख्या पिछले दो-तीन सालों में बढ़ी है। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना बेरोजगारों के लिए काफी मददगार साबित हुई है। उन्हें ज्यादा से ज्यादा काम देने का प्रयास किया जा रहा है।
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