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19 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण अधूरा

Mon, 09 Mar 2015 11:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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नवनिर्मित मेडिकल कालेज के उद्घाटन के लिए बृहस्पतिवार को यहां आ रहे मुख्यमंत्री काश! बांदा जिले के 19 गांवों में अधूरे पड़े प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को भी चालू करा देते। बजट (पैसे) के अभाव में ये स्वास्थ्य केंद्र पिछले करीब सात साल से बनकर तैयार नहीं हो पाए। ग्रामीण बाशिंदों के लिए मेडिकल कालेज से पहले ये स्वास्थ्य केंद्र ज्यादा जरूरी हैं।
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बसपा सरकार ने वर्ष 2006-07 में बांदा जिले के 19 गांवों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) स्वीकृत किए और बजट देकर इनका निर्माण कार्य शुरू करा दिया था। भवन निर्माण का काम उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड को मिला है।

सभी 19 पीएचसी भवनों के लिए प्रति भवन लगभग 42 लाख रुपये के इस्टीमेट के आधार पर 7 करोड़ 92 लाख रुपये शासन ने निर्माण निगम को दे दिए थे। तभी निर्माण शुरू हुआ। बाद में निर्माण निगम ने दिन गुजरने के साथ ही लागत बढ़ना बताकर इस्टीमेट संशोधित करके शासन से और बजट मांगा।
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शासन निर्माण निगम को 9 करोड़ 82 लाख 71 हजार रुपये दे चुका है। निर्माण निगम इसमें 9 करोड़ 34 लाख 54 हजार रुपये खर्च हो जाना बता रहा है। लेकिन भवनों का निर्माण 43 फीसदी से लेकर 70 फीसदी तक ही पूरा हो पाया है। इसके बाद से काम ठप है। निर्माण निगम 5 करोड़ 71 लाख 62 हजार रुपये और मांग रहा है।

19 पीएचसी चालू हो जाएं तो लगभग एक सैकड़ा से ज्यादा गांवों के लाखों ग्रामीणों को गांव स्तर पर ही प्राथमिक स्वास्थ्य और चिकित्सा सेवाएं हासिल हो जाएं। लोगों का कहना है कि मेडिकल कालेज से कहीं ज्यादा ये कारगर होंगे।

पीएचसी निर्माण कर रही एजेंसी ने साल दर साल लागत बढ़ा दी। पूर्व में हरेक पीएचसी की लागत का इस्टीमेट 42.12 लाख रुपये बनाया गया था। इसे स्वीकृति दिए जाने के साथ ही यह पूरा बजट दे भी दिया गया। लेकिन इसके बाद दो मर्तबा निर्माण निगम ने लागत पुनरीक्षित की। जो बढ़कर लगभग दोगुनी हो गई।

पूर्व मेें सभी 19 केंद्रों का बजट 7 करोड़ 92 लाख 21 हजार था। कुछ अरसे बाद निर्माण निगम ने इसे बढ़ाकर 10 करोड़ 35 लाख 71 हजार कर दिया। निर्माण निगम की मांग यहीं नहीं थमीं। तीसरी बार फिर लागत पुनरीक्षित करके इसे 16 करोड़ 8 लाख 32 हजार तक पहुंचा दिया। इसमें निर्माण निगम को 9 करोड़ 82 लाख 71 हजार रुपये मिल चुके हैं।

निर्माण निगम ने 9 करोड़ 34 लाख 54 हजार रुपये खर्च कर दिए हैं। अब 5 करोड़ 71 लाख 62 हजार और मांगे हैं। माना जा रहा है कि कुछ दिन बजट और न मिला तो निर्माण निगम एक बार फिर लागत पुनरीक्षित करके और अधिक पैसे की फरमाइश भेजेगी। शुरू में ही यह सभी भवन बन जाते तो मूल इस्टीमेट 7 करोड़ 92 लाख में ही यह पूरे हो जाते। अब दोगुने महंगे हो गए हैं।
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