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त्याग धर्म है और दान पुण्य

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बांदा। पर्यूषण पर्व के आठवें दिन जैन धर्म के अनुयायियों ने उत्तम त्याग धर्म का पालन किया। जिनालयों में श्रावक, श्राविकाओं ने भगवान मुनि सुब्रत नाथ की धांति धारा, अभिषेक कर जैन शास्त्रों का पाठ किया। जैन मुनि ने छोटी बाजार स्थित जैन मंदिर में त्याग धर्म का अनुसरण करने के बारे में प्रवचन दिए।
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अभिनंदन सागर महाराज ने कहा त्याग धर्म है और दान पुण्य। उन्होंने कहा कि व्यक्ति धन को दान करना त्याग समझ लेता है। जबकि दान और त्याग में बहुत बड़ा अंतर है। दान करने से केवल पुण्य मिलता है।
यह बाहरी त्याग की श्रेणी में आता है, जबकि आंतरिक त्याग वह होता है, जब अपनी आत्मा से राग, द्वेष, कषाय, अहंकार, लोभ, लालच, आदि का विकार भाव छूट जाए। इस त्याग से ही आत्मा निर्मल पवित्र होती है।
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मीडिया प्रभारी दिलीप जैन ने बताया कि तारण तरण दिगंबर चैत्यालय में भी कार्यक्रम हुए। गुरु तारण स्वामी पर कई प्रतियोगिताएं हुईं। पुराने चैत्यालय में पूजा विधान एवं मंत्रों के साथ धर्म ध्वजा फहराई गई। महिलाओं ने ढोलक और मजीरे के साथ भजन गाएं।
मां जिनवाणी के सामने नृत्य द्वारा चंवर और आरती की। मंडलाचार्य महाराज तारण स्वामी के लिखे 14 ग्रंथों का पाठ किया।
इस अवसर पर मुकेश जैन, जवाहर जैन, सुरेश जैन, दर्शित शास्त्री, राकेश जैन, कल्लू जैन, आशीष जैन, सनत जैन, सौरभ जैन, संजू जैन, विपिन जैन, रितेश जैन, टिंकल जैन, राहुल जैन, जितेंद्र जैन, नरेंद्र जैन, मनोज जैन, प्रमोद जैन, सरोज जैन, गोल्डी, सैली जैन, किरण जैन, नीलम जैन, मिंटी जैन, दिव्या जैन, सीमा जैन, रश्मि जैन, मीनू, प्रिया जैन आदि शामिल रहीं।
पर्यूषण पर्व पर किया रक्तदान
पर्यूषण पर्व के पावन अवसर पर आवास विकास में रहने वाले राकेश कुमार जैन ने जिला अस्पताल में भर्ती 72 वर्षीय रामशरण अग्रवाल (कैलाशपुरी) को ब्लड डोनेट कर अपने व्रत को सार्थक किया। राकेश जैन जिला बचत अधिकारी हैं।
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