आरबीआई लखनऊ प्रबंधक मितेश शर्मा व सहायक प्रबंधक सौरभ रस्तोगी।
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बांदा। भारतीय रिजर्व बैंक के दो अधिकारियों ने बैंकों में अभिलेखों की जांच की। पुरानी करेंसी जमा व भुगतान संबंधी दस्तावेज बारीकी से देखे। अर्बन कोआपरेटिव बैंक में पांच घंटे तक पड़ताल की। उधर, नाबार्ड की टीमों ने बबेरू और नरैनी के सहकारी बैंकों की फाइलें खंगालीं। नोटबंदी के दौरान बैंकों में गड़बड़ी की शिकायतों पर भारतीय रिजर्व बैंक का रुख सख्त है। मंगलवार को गोपनीय तरीके से यहां आए लखनऊ प्रबंधक मीतेश शर्मा और सहायक सौरभ रस्तोगी ने अर्बन कोआपरेटिव बैंक में लेन-देन संबंधी दस्तावेज की पड़ताल की। पुराने 500 व 1000 नोटों के जमा और भुगतान आदि का ब्योरा इकट्ठा किया।
सीसी कैमरे के फुटेज भी देखे। बुधवार को सुबह रोडवेज बस से लखनऊ वापस जाते समय प्रबंधक मीतेश शर्मा का कहना था कि गड़बड़ी की शिकायतों पर बैंकों की जांच हो रही है। उनका पड़ताल गोपनीय है। रिपोर्ट आरबीआई उच्चाधिकारियों को देंगे। उधर, अर्बन कोआपरेटिव बैंक, गूलरनाका शाखा प्रबंधक सुशील दीक्षित ने स्वीकारा कि आरबीआई के दोनों अधिकारी दोपहर 1 बजे आए और 7 बजे तक जांच-पड़ताल की। उन्होंने जो दस्तावेज मांगे उपलब्ध करा दिए गए। बैंक में कोई गड़बड़ी नहीं मिली। उधर, दो दिन पूर्व नाबार्ड की टीमों ने बबेरू और नरैनी स्थित सहकारी बैंकों में लेन-देन और पुरानी करेंसी जमा होने का डिटेल लिया।