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बारिश के दो महीने डकैतों के लिए बनते काल

Fri, 21 Aug 2015 12:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,बांदा
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बारिश के जुलाई और अगस्त के महीने बीहड़ के डकैतों के लिए काल साबित हुए हैं। बीती 17 जुलाई के अंक में अमर उजाला ने प्रकाशित किया था कि इन्हीं दो महीनों में पाठा के डकैतों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है। पिछले माह जुलाई की शुरुआत में बलखड़िया मारा गया।
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अब अशोक का अंत हो गया। बताया जाता है कि बारिश में जंगल काफी घने हो जाते हैं। तमाम कीड़े मकौड़े पैदा हो जाते हैं। इसके अलावा बीहड़ में कीचड़ भी एक जगह से दूसरी जगह विचरण में दिक्कत पैदा करता है। ऐसे में डकैत नीचे के हिस्सों में चले आते हैं और पुलिस या गैंगवार का निशाना बनते हैं।   

जुलाई-अगस्त में मारे गए इनामी डकैत
16 अगस्त 2005- राजकरन पटेल उर्फ चच्चू (20 हजार), 23 जुलाई 2007 -शिवकुमार पटेल उर्फ ददुआ (5 लाख), मईयादीन पटेल (50 हजार), छोटवा पटेल (50 हजार सहित 10 डकैत), 04 अगस्त 2008 -अंबिका पटेल उर्फ ठोंकिया (5 लाख), 02 जुलाई 2015 - स्वदेश पटेल उर्फ बलखड़िया (5 लाख), 20 अगस्त 2015- अशोक कोल (12 हजार)
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आखिर कहां से होती है असलहों की सप्लाई
पिछले आठ सालों में ददुआ, बलखड़िया से लेकर अशोक कोल तक दो दर्जन से ज्यादा डकैत मारे गए। इन डकैतों के कब्जे से दर्जनों अत्याधुनिक राइफले पुलिस ने बरामद कीं। बावजूद इसके फायर पावर में डकैत कभी कमजोर नहीं पड़े। सवाल यह उठता है कि डकैतों के पास असलहे और कारतूस आते कहां से हैं।

पाठा में कहां लहलहाती है असलहों की फसल! कई साल पहले ठोकिया को स्टेनगन मुहैया कराने के मामले में सत्ताधारी दल के नेता का नाम उछला था। दस्यु संरक्षण में तो एक पूर्व सांसद को जेल तक जाना पड़ा था।

दस्यु दलों के पास एके 47, सेमी आटोमैटिक राइफल, 303 बोर, थर्टी फील्ड़ स्प्रिंग, 375 बोर मैग्नम, 256 बोर जैसी तमाम ऐसे राइफलें होनी बताई जाती है जो बहुत मुश्किल से मुहैया होती हैं। ये असलहे मुठभेड़ में पुलिस पर भारी पड़ते हैं।

पिछले आठ साल में डेढ़ दर्जन बड़े और छोटे डाकू मारे गए। इनसे पुलिस ने तमाम अत्याधुनिक हथियार बरामद किए। मारे गए डकैतों में ठोकिया, शिवमूरत पटेल, रागिया से तीन सेमी आटोमैटिक राइफल, बंटी लाला से स्टेनगन, राजा खान व शिवकरन कोल से थर्टी फील्ड स्प्रिंग राइफल, राहुल मिश्रा से डबल बैरल सहित मारे गए अन्य डकैतों से 315 ूबोर जैसी डेढ़ दर्जन तमाम राइफलें पकड़ीं। सवाल यह उठता है कि डकैतों के पास असलहे-कारतूस आते कहां से है।
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