जिनके नाम से बुंदेलखंड और बांदा को पहचाना जाता रहा उन्हीं की पहचान को मिटाया जा रहा है। प्रसिद्व जनवादी कवि केदारनाथ अग्रवाल के यहां स्थित यादगार आवास को बेचने और उसे मिटाने की कवायद शुरू हो गई है। इससे दुखी और क्षुब्ध कवि और साहित्यकारों ने जिला अधिकारी से मिलकर हस्तक्षेप करने और इस विरासत को बचाने की मांग की है।
सिविल लाइन स्थित डीसीडीएफ के पास मशहूर कवि बाबू केदारनाथ अग्रवाल का खपरैलदार पुराना आवास है। जिलाधिकारी को सामूहिक हस्ताक्षरों से दिए ज्ञापन में कवियों और लेखकों आदि ने कहा कि इस मकान में बाबू केदार करीब 70 वर्षों तक रहे।
हिंदी साहित्य से जुड़ी गतिविधियों का यह केंद्र रहा। राहुल सांकृत्यान, नागार्जुन, महादेवी वर्मा, हरिवंश राय बच्चन और त्रिलोचन आदि महान कवि और साहित्यकार यहां आते-जाते रहे। इस मकान में दुर्लभ पत्र-पत्रिकाओं का संग्रह है। बाबू केदारनाथ के निधन के बाद भी उनकी यादव में यह स्मारक बरकरार है। इस आवास को सरकारी तौर पर संरक्षित किए जाने की मांग होती रही है।
ज्ञापन में साहित्यकारों ने कहा कि केदार बाबू के परिजन किसी स्थानीय भूमाफिया से मिलकर इस आवास को बेचना चाहते हैं। इसके लिए इकरारनामा किया गया है। खरीदने वाले ने बृहस्पतिवार की शाम से यहां निर्माण भी शुरू कर दिया है।
लेखकों ने कहा कि यह विरासत को मिटाने की कोशिश है। उन्होंने डीएम के माध्यम से सरकार से मांग की है कि असाधारण कवि के आवास को अध्ययन उद्देश्य के लिए सरकारी तौर पर संरक्षित कराया जाए। अधिग्रहीत न होने तक इसमें किसी भी प्रकार का निर्माण रोका जाए।
ज्ञापन देने वालों में डीसीडीएफ के अध्यक्ष लेखक सुधीर सिंह, जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष केशव तिवारी और सचिव उमाशंकर सिंह परमार, भाकपा जिला सचिव रामचंद्र सरस, प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह (बड़ोखर), अधिवक्ता संघ पूर्व अध्यक्ष रणवीर सिंह चौहान सहित कई अधिवक्ता, लेखक और साहित्यकार शामिल रहे। डीएम ने उन्हें भरोसा दिलाया कि इस बारे में कार्रवाई के लिए पुलिस अधीक्षक को लिख रहे हैं।