जिला विद्यालय निरीक्षक दिनेश कुमार ने बताया कि जिले के 49 राजकीय, 30 सहायता प्राप्त सहित 96 मान्यता प्राप्त विद्यालयों से चयनित मेधावी विद्यार्थी अब कार्यशालाओं, संवाद सत्रों और प्रेरक कार्यक्रमों में शामिल होंगे। वे अपने अनुभव साझा करेंगे कि कैसे उन्होंने पढ़ाई की योजना बनाई, कठिन विषयों को समझा, समय प्रबंधन किया और परीक्षा के दबाव को किस तरह संभाला। इसके अलावा विद्यार्थियों को उत्तर पुस्तिका में उत्तर लिखने के तरीके और दोहराव की रणनीति पर भी व्यावहारिक सुझाव दिए जाएंगे।
डीआईओएस ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य सिर्फ परीक्षा परिणाम सुधारना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास की भावना विकसित करना है। विभाग का मानना है कि छात्र जब अपने ही बीच से किसी सफल विद्यार्थी को सामने पाते हैं, तो प्रेरणा का असर गहरा होता है। इस कार्यक्रम के तहत नवंबर से दिसंबर तक जिलेभर के विद्यालयों में टॉपर टॉक सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसमें पिछले सत्र के टॉपर विद्यार्थियों को मुख्य वक्ता बनाया जाएगा।
वे परीक्षार्थियों के प्रश्नों का उत्तर देंगे और बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए व्यवहारिक टिप्स साझा करेंगे। शिक्षकों का कहना है कि यह कदम विद्यार्थियों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा। इससे न केवल परीक्षा भय खत्म होगा, बल्कि विद्यार्थियों में प्रतिस्पर्धात्मक भावना के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। शिक्षा विभाग उम्मीद कर रहा है कि इस पहल से आगामी बोर्ड परीक्षाओं में जिले का प्रदर्शन पहले से बेहतर रहेगा।
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विद्यालय में तैयार होगी मेधावियों की टॉप टेन सूची
बांदा। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा संचालित जिले के 175 विद्यालयों में हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के उत्तीर्ण विद्यार्थियों की सूची में 10 मेधावियों को टाॅप टेन सूची रखा जाएगा। टाॅप टेन सूची में शामिल मेधावी छात्रों को विद्यालय के प्रधानाचार्य सप्ताह में कम से कम दो बार बुलाएंगे और यह मेधावी छात्र अपने अनुभव को विद्यार्थियों के साथ साझा करेंगे।
फोटो- 07 राजकीय इंटर कालेज बांदा। संवाद