फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सर को बताया था, पर ये कैसे बताती कि क्या हो रहा

विज्ञापन
विज्ञापन
बांदा। छेड़छाड़ से तंग 12वीं की छात्रा ने अपने साथ हो रही ब्लैकमेलिंग की बात कालेज के किसी शिक्षक को बताई थी। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि शिक्षक से उसने क्या और कितने दिन पहले बताया? शिक्षक की तरफ से इस पर क्या कार्रवाई की गई? शिक्षक ने घरवालों को या पुलिस को घटना क्यों नहीं बताई?
विज्ञापन

छात्रा ने फांसी लगाने से पहले सुसाइड नोट में पूरी बात लिखी है। पत्र के अंत में लाल रंग से लिखा कि मां का ख्याल रखना। पुलिस जांच कर रही है कि यह रंग है या खून। छात्रा के शरीर पर कहीं कटे का निशान नहीं मिला है।
ये है लिखा सुसाइड नोट में
....बहन मैं तुम्हारे पास आकर सब कुछ बताना चाहती थी। ...मेरे साथ क्या कर रहा है। मुझे माफ कर देना। मैं तुमको जिंदा छोड़कर जा रही हूं। मैंने सर को बताया था कि...मुझे ब्लैकमेल कर रहा है। पर मैं उनसे कैसे बताती कि मेरे साथ क्या हो रहा है। सर ने कभी मुझे गलत नहीं सिखाया। हमेशा अच्छा ही सिखाते थे। मैंने वैसा किया भी। मैं क्या करूं। मेरे पास दूसरा कोई रास्ता नहीं था मरने के अलावा।
विज्ञापन

बर्दाश्त करती रही, घर और पुलिस को नहीं बताया
सुसाइड नोट में गांव के युवक द्वारा परेशान किए जाने की बात के बारे में मृतक छात्रा के परिजनों का कहना है कि उसने युवक की हरकतों को बर्दाश्त किया। घर में भी नहीं बताया। न ही पुलिस को इत्तिला दी। काफी समय के बाद जब घरवालों को पता चला तो युवक को सुधर जाने की हिदायत दी, लेकिन फिर भी नहीं माना। यह बात मृतका के भाई ने भी स्वीकारी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें