बांदा। केन नदी में पहली बार डाल्फिन दिखने से सर्वे में लगी टीम उत्साहित है। टीम सदस्यों का कहना है कि एक डाल्फिन के मिलने से यह बात साफ हो गई है कि केन में और डाल्फिन हो सकती है। प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) प्रमोद गुप्ता ने सोमवार को अभियान की शुरुआत कराई।
मध्य प्रदेश से प्रवाहित होकर चिल्ला घाट में यमुना नदी मेें जा मिली केन नदी में पानी का जबरदस्त टोटा है। अभी बरसात का मौसम पूरी तरह विदा नहीं हुआ और नदी कई स्थानों पर छिछली जल धारा में सिमट गई है। डाल्फिन की तलाश मेें नाव पर निकली टीम को भारी दुश्वारियां हुईं। कई स्थानों पर टीम के सदस्यों ने नाव को हाथों में उठाकर पतली जल धारा में दूर तक सफर किया।
टीम में शामिल स्वयंसेवी आशीष सागर ने बताया कि मध्य प्रदेश की सरहद पर बिल्हरका, बरसड़ा बुुजुर्ग और रनगढ़ दुर्ग आदि कई स्थानों पर नदी में पानी बेहद कम है। डाल्फिन का मांस कड़वा होता है। शिकारी इसे नहीं पसंद करते। सर्वे टीम में वन रक्षक कमलेश कुमार, रामसेवक, राम प्रसाद, बाबूलाल, और वन दरोगा शिवगणेश व संतोष के अलावा टीम में प्रवास सोसायटी के आशीष सागर भी शामिल रहे। टीम के पास जीपीएस सिस्टम, वीडियो कैमरा, डिजिटल कैमरा इत्यादि उपकरण हैं।