चित्रकूट। महाराष्ट्र में पनीर पर प्रतिबंध लगने के बाद चित्रकूट में खाद्य सुरक्षा विभाग ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच को लेकर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है।
पिछले दो वर्षों के दौरान चित्रकूट जिले में पनीर के तीन नमूने जांच में फेल पाए गए हैं। इन नमूनों के फेल होने का मुख्य कारण दूध में पानी की मिलावट बताया गया है।
हैरत की बात यह है कि इस वर्ष अप्रैल से अब तक केवल दो नमूने और भरे गए हैं लेकिन उनकी जांच रिपोर्ट अभी नहीं आई है। विभाग लैब से रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहा है। कुल मिलाकर पिछले दो साल में 19 नमूने जांच के लिए भेजे गए थे, जिनमें तीन फेल और दो की रिपोर्ट लंबित है।
जिले में भारी मात्रा में पनीर का कारोबार होता है। यहां कई बड़े प्रतिष्ठान पनीर बनाते हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन द्वारा वर्ष 2025-26 में कुल 17 पनीर नमूनों की जांच की गई थी। इनमें से 14 नमूने मानकों के अनुरूप पाए गए, जबकि तीन नमूने गुणवत्ता के मानकों पर खरे नहीं उतरे।
प्राप्त जांच रिपोर्ट के अनुसार, दूध की खराब गुणवत्ता के कारण ही पनीर की गुणवत्ता पर भी असर पड़ा। फेल हुए दुकानदारों को नोटिस जारी की जा चुकी है। सहायक आयुक्त खाद्य शशांक त्रिपाठी ने बताया कि दुकानदारों पर नोटिस का सही जवाब न मिलने पर कार्रवाई की जाती है।