फोटो-15-घटनास्थल पर पड़ा मकान का मलबा। संवाद
फोटो-16-पोस्टमार्टम हाउस में खड़े राजेश के परिवारीजन व ग्रामीण। संवाद
पिता के सीने पर खेलते-खेलते सो गई थी रश्मि, गेहूं के ड्रम के नीचे दबे मिले दोनों के शव
कच्ची दीवार गिरने से पक्के मकान में मलबा भर गया, रात में फावड़े से परिजन ने हटाया मलबा
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। राजेश के घर में मंगलवार रात जब पड़ोसी की कच्ची दीवार भरभराकर गिरी तो देखते ही देखते पक्के मकान में पहाड़ जैसा मलबा भर गया। बारिश से कच्ची मिट्टी दलदल में बदल चुकी थी। मकान गिरने की आवाज सुनकर परिजन और ग्रामीण फावड़े लेकर मौके पर पहुंचे। अंधेरी रात में मलबा हटाकर सावित्री और तीन वर्षीय लक्ष्मी को तो बाहर निकाल लिया गया लेकिन छह माह की रश्मि का कहीं पता नहीं चला।
परिजन कच्ची मिट्टी हटाने के बाद पक्के मकान की ईंटें निकालते रहे। काफी मशक्कत के बाद गेहूं से भरे भारी ड्रम के नीचे राजेश और उसकी छह माह की बेटी रश्मि के शव मिले। दोनों को एक साथ देखकर परिजन बदहवास हो गए। राजेश के बड़े भाई फूल सिंह ने बताया कि मंगलवार शाम राजेश घर आया था। वह अपनी दोनों बेटियों के साथ कुछ देर बाहर बैठकर खेला था। इसके बाद परिवार ने खाना खाया और सो गया। रात में पड़ोसी की जर्जर कच्ची दीवार अचानक राजेश के मकान पर आ गिरी। मलबे के साथ गेहूं से भरा भारी ड्रम भी राजेश और रश्मि के ऊपर गिर गया। दोनों ड्रम और मलबे के भारी बोझ के नीचे दब गए।
फूल सिंह ने बताया कि रश्मि अक्सर पिता के पास ही रहती थी। हादसे के बाद उसका शव भी पिता के सीने के पास मिला। उन्होंने कहा कि अगर गेहूं का भारी ड्रम दोनों के ऊपर नहीं गिरा होता तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने बताया कि पड़ोसी रामदास की कच्ची दीवार काफी पुरानी और मोटी थी। पिछले वर्ष से ही दीवार जर्जर हो चुकी थी। मंगलवार को दिनभर और रात में हुई बारिश के कारण मिट्टी कमजोर हो गई। आखिरकार दीवार राजेश के मकान पर आ गिरी और परिवार की खुशियां उजड़ गईं।
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पति और बेटी की मौत से टूटा परिवार
राजेश खेती-किसानी कर पत्नी और दो बेटियों का पालन-पोषण करता था। हादसे में राजेश और छह माह की बेटी रश्मि की मौत से परिवार टूट गया है। उसकी पत्नी सावित्री और तीन वर्षीय बेटी लक्ष्मी का मेडिकल कॉलेज में उपचार चल रहा है। परिजनों के मुताबिक, दोनों की हालत फिलहाल खतरे से बाहर है।