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Banda News: आपराधिक राजसत्ता के विरुद्ध एकजुट होकर किया जाएगा संघर्ष

Sun, 21 Sep 2025 11:51 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
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जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय सम्मेलन के अंतिम दिन रविवार को समापन सत्र में मौजूद लेखक। स्रोत-सं
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बांदा। जनवादी लेखक संघ के 11वें राष्ट्रीय सम्मेलन में तीसरे दिन सोमवार को विभिन्न राज्यों से आए लेखकों ने विचार रखे। शनिवार को प्रस्तुत रिपोर्टों पर चर्चा की गई। इसके बाद सभी प्रस्ताव पास किए गए। कहा गया कि भ्रष्ट और आपराधिक राजसत्ता के विरुद्ध एकजुट होकर संघर्ष किया जाएगा।
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बड़ोखर खुर्द गांव स्थित प्रेम सिंह की बगिया में संघ की ओर से आयोजित सम्मेलन को लेखक बली सिंह दिल्ली, बिहार से आए विनिताभ और शाह जफर इमाम के अलावा झारखंड से कुमार सत्येंद्र आदि ने संबोधित किया। सभी राज्यों से आए दो-दो लेखकों ने संबोधन किया। शनिवार को सम्मेलन में कई मुद्दों पर प्रस्ताव रखे गए थे।
रविवार को लेखकों की उपस्थिति में पास किए गए प्रस्तावों प्रस्तावों में दलित समुदाय के उत्पीड़न और 2020 की नई शिक्षा नीति, लेबर कोड, संवैधानिक मूलाधारों पर निरंतर हमले, पाठ्यक्रमों के सांप्रदायीकरण, फिलिस्तीन की भयावह त्रासदी और भारत के रवैए, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमले के साथ ही भ्रष्ट और आपराधिक राजसत्ता के विरुद्ध एकजुट संघर्ष करने का प्रस्ताव शामिल हैं। जनवादी लेखक संघ के सचिव और सम्मेलन आयोजक सुधीर सिंह व स्वागत समिति के अध्यक्ष प्रेम सिंह ने सभी का आभार जताया।
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चंचल अध्यक्ष और नलिन रंजन महासचिव चुने गए
बांदा। राष्ट्रीय सम्मेलन में राज्यों से हिंदू और उर्दू लेखकों का जमावड़ा रहा। सभी की उपस्थिति में सांगठनिक चुनाव भी हुआ। चंचल चौहान को जनवादी लेखक संघ का राष्ट्रीय अध्यक्ष, संजीव कुमार को कार्यकारी अध्यक्ष और नलिन रंजन को महासचिव चुना गया। इसके साथ ही बजरंग बिहारी तिवारी, संदीप मील, प्रेम तिवारी को संयुक्त महासचिव, नौ लेखकों को उपाध्यक्ष और नौ लेखकों को सचिव पद की जिम्मेदारी सर्वसम्मति से सौंपी गई। अंत में सुधीर सिंह ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया। (संवाद)
बुंदेलखंडी दीवारी नृत्य के साथ दी गई विदाई
बांदा। राष्ट्रीय सम्मेलन के अंतिम दिन रविवार को कार्यक्रम समापन के बाद रमेश पाल की टीम ने बुंदेलखंडी दीवारी कला का शानदार प्रदर्शन किया। विभिन्न राज्यों से आए लेखकों ने दीवारी कला की खूब सराहना की। दीवारी कला का शानदार प्रदर्शन देखकर लेखकों ने तारीफ के पुल बांधे। इसी के साथ लेखकों को विदाई दी गई। (संवाद)

जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय सम्मेलन के अंतिम दिन रविवार को समापन सत्र में मौजूद लेखक। स्रोत-सं

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