बांदा। पुलिस भले ही सख्ती करने के लाख दावे करे, लेकिन ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और ऑटो में सवारियों की ओवरलोडिंग पर अंकुश नहीं लग रहा है। चंद रुपयों की लालच में ऑटो चालक 6-7 की बजाय 10 से 15 सवारियां भरकर चलते हैं। ऑटो चालकों का रफ्तार पर भी काबू नहीं रह पाता है और हादसा हो जाता है।
नरैनी में हादसे का शिकार ऑटो में भी क्षमता से अधिक सवारियां थी। एक ही परिवार के 13 लोग ऑटो में सवार थे। लालच यदि ऑटो चालकों का होता है तो सवारियां भी कुछ पैसे बचाने के चक्कर में एक ही ऑटो में भूसे की तरह भरकर बैठने से बाज नहीं आ रही हैं।
पिछले दिनों चित्रकूट में भी सवारियों से खचाखच ऑटो पलटने से कई लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। इस पुलिस ने कुछ दिन तो ओवरलोड़िंग के खिलाफ अभियान चलाया, बाद में वह भी ठंडे बस्ते में चला गया। कामतानाथ परिसर के आसपास पूरे दिन ऑटो का जमावड़ा लगा रहता है, जो कि आसपास से आने वाली सवारियों की ओवरलोडिंग करते हुए कभी भी देखे जा सकते हैं। पुलिस का इन ऑटो के चालकों पर कोई जोर नहीं है।
परिवार में थी पौत्र के ठीक होने की खुशी
पोस्टमार्टम हाउस में राजकुमार के भतीजे दिनेश मिश्रा ने बताया कि राजकुमार खेती-किसानी करते थे। उनके पास 18 बीघा जमीन है। तीन पुत्र और दो पुत्रियां हैं। बताया कि राजकुमार का पौत्र चार साल से बीमार चल रहा था। उसके ठीक होने की मनौती मानने के लिए पुंगरी से ऑटो बुक करके भगवान कामतानाथ की परिक्रमा लगाने के लिए चित्रकूट गए थे। वापस लौटते समय रात में हादसा हो गया।
किसी जनप्रतिनिधि का था जानलेवा डंपर
सूत्रों की मानें तो जिस डंपर से यह हादसा हुआ है, वह किसी जनप्रतिनिधि का है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात होते ही कस्बे के मुख्य चौराहे से अवैध रूप से ओवरलोड वाहनों के निकलने का सिलसिला शुरू हो जाता है। यह खेल करीब एक माह से चल रहा है। बालू से भरे डंपर करतल की तरफ से आते हैं जो रात भर थाना व तहसील के सामने से गुजरते हैं। मौरंग कारोबारियों को किसी का भय भी नहीं है।