बांदा। मंडल मुख्यालय से मात्र आठ किलोमीटर दूर और जौरही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र के जमालपुर गांव में डेंगू का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा। मौत दर मौत का सिलसिला जारी है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के निरोधात्मक उपायों के दावे बेदम हो रहे हैं। ताजी घटना में इंटरमीडिएट पास कर चुकी छात्रा की डेंगू से मौत हो गई। इसे मिलाकर अब तक डेंगू से छह जानें जा चुकी हैं। तमाम लोग बुखार की गिरफ्त में हैं। पिछले करीब एक माह से जमालपुर डेंगू के लिए सुर्खियों में है। कई मौतों के बाद कई दिनों तक प्रशासन सोता रहा। मीडिया में मौतें सुर्खी बनीं तो प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारी यहां पहुंचे। डेंगू से बचाव और मच्छरों के सफाए से कहीं ज्यादा अफसरों ने अपना समय शानदार शामियानों और कुर्सियों में बैठकर भाषणों में बिताया। सरकार की योजनाएं बताईं।
अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. राकेश रमन और मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. जीएस वाजपेई ने यहां जायजा लिया। कई डाक्टरों की टीमें भेजी गईं और सफाई इत्यादि कराई गई। लेकिन इन सब के बाद भी डेंगू का डंग जमालपुर के लोगों को डसता जा रहा है। हेमा (19) पुत्री स्वर्गीय देशराज चित्रकूट जनपद के खंडेहा गांव की रहने वाली थी। जमालपुर में उसकी बहन सविता ब्याही है। पूरी तरह स्वस्थ्य और चंगी हेमा बहन के पास आई थी। तभी उसे बुखार ने जकड़ लिया। छह दिनों तक उसका इलाज बांदा शहर के प्राइवेट अस्पताल में हुआ। हालत न सुधरने पर तीन दिन पहले उसे कानपुर रेफर कर दिया गया। दो दिन हैलट में इलाज के बाद से कानपुर में ही एक प्राइवेट अस्पताल में लाया गया लेकिन डॉक्टर से बचा नहीं सके। बुधवार को सुबह कानपुर में हेमा की मौत हो गई। उसने इसी वर्ष इंटर की परीक्षा पास की थी। दो बहनों में वह छोटी बहन थी।