सफाई कर्मियों की दो दिन की हड़ताल में ही मंडल मुख्यालय बांदा शहर गंदगी से पट गया। मंगलवार को महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं को कूड़ा-करकट से पटी पड़ी सड़कों से होकर मंदिरों का रास्ता तय करना पड़ा।
दूसरे दिन शाम नगर पालिका ईओ और सफाई कर्मचारी नेताओं में समझौता वार्ता के बाद हड़ताल खत्म हो गई, लेकिन सफाई बुधवार से ही होगी।
शासनादेश के मुताबिक संविदा कर्मियों को मानदेय और स्थायी कर्मियों को वेतन देने की मुख्य मांग लेकर उत्तर प्रदेश राज्य सफाई मजदूर संघ के आह्वान पर शहर के सभी चार सैकड़ा संविदा और स्थायी सफाई कर्मी सफाई बंद करके हड़ताल पर चले गए थे। नतीजे में शहर में कहीं भी सफाई नहीं हुई। हर सड़क और गली कचरे और गंदगी से पट गई।
श्रद्धालुओं को रास्तों में पड़े कूड़े से होकर गुजरना पड़ा। उधर, मंगलवार को सुबह से ही ईओ वीरेंद्र श्रीवास्तव सफाई कर्मी नेताओं से बातचीत और समझौते के प्रयास में जुट गए। उनके साथ कलेक्ट्रेट के प्रशासनिक अधिकारी सईद अहमद, एलबीसी रजमोहन प्रसाद और सफाई निरीक्षक हरिशंकर निरंजन भी रहे।
अंतत: शाम को सफाई कर्मियों के धरना स्थल अशोक लाट में ईओ और उपरोक्त कर्मचारियों ने सफाई कर्मी नेताओं से बातचीत के बाद लिखित समझौता किया। इसमें सफाई कर्मियों की ओर से प्रांतीय सचिव अनिल भारतीय ने हस्ताक्षर किए। प्रेम हजारिया, देवीदीन, गीता, मुन्नी देवी, मुकेश तांबे आदि शामिल रहे।
अफसरों ने चुप्पी साधी, अध्यक्ष बाहर गईं
बांदा। सफाई कर्मियों की हड़ताल के बावजूद कोई बड़ा अफसर इसे खत्म कराने के प्रयासों में खुलकर नजर नहीं आया। केवल सिटी मजिस्ट्रेट ने सिर्फ मौखिक आदेश दिया। उधर, नगर पालिका अध्यक्ष विनोद जैन भी जनपद से बाहर बताईं गईं। अन्य जन प्रतिनिधि भी चुप्पी साधे रहे।