फोटो- 23 कवियों को सम्मानित करते कुलपति। संवाद
बांदा। कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय उत्तर क्षेत्रीय किसान मेला आयोजित हुआ। मेले की सांस्कृतिक संध्या के प्रथम दिन एक भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें अनेक नामचीन कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं का मन मोहा।
कार्यक्रम की शुरुआत अंबे तिवारी ने मधुर सरस्वती वंदना के साथ की। केवल प्रसाद द्विवेदी ने फागुन आयो रे शीर्षक से अपनी प्रस्तुति दी। राम प्रसाद वर्मा वियोगी ने गीत गाता चलूं सुनाकर सभी को भावुक किया। डॉ शिव प्रकाश सिंह ने कोई बताए, महुआ इतना क्यूं गमके कविता पढ़ी। आर सी योगा ने सजा गया है गगन शीर्षक से अपनी रचना प्रस्तुत की। प्रकाशचंद्र सक्सेना ने किसानों को समर्पित कविता किसानों को किसानों से मिलाने को लगा मेला सुनाई। राजेंद्र तिवारी स्वदेश ने सिर्फ मोबाइल को मालूम बंदे का कैरेक्टर कैसा है पर विचार रखे। योगेश कुमार शिक्षक ने सुना है चांद की अब मुंह दिखाई रोज होती है कविता से सबका ध्यान खींचा। आयुषी त्रिपाठी ने युवाओं का आह्वान करती अपनी कविता पढ़ी। राजेश तिवारी रंजन ने फूटी किस्मत आज पिता की रोटी मांगे मान की शीर्षक से प्रस्तुति दी। अखिल भारतीय साहित्य परिषद के जिलाध्यक्ष राम प्रताप शुक्ला मानस किंकर ने दोहरे चरित्र पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि गरजते हैं वही बादल जो बरसने को तरसते हैं। उनकी यह पंक्ति श्रोताओं के बीच काफी सराही गई।
सम्मेलन के अंत में कुलपति डॉ.एसवीएस. राजू उपस्थित रहे। निदेशक प्रसाद डॉ. एसएन के बाजपेयी ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। दोनों ने सभी कवियों और उपस्थित जन का आभार व्यक्त किया। इसके बाद सभी सम्मानित कवियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन जगन्नाथ पाठक ने किया।