करीब ढाई दशक से बंद पड़ी बांदा कताई मिल में बेच डाली गईं मशीनों और अन्य सामानाें की जांच रिपोर्ट देने में मिल प्रबंधन टालमटोल कर रहा है। औद्योगिक और वित्तीय पुनर्निर्माण बोर्ड (बाइफर) ने मिल प्रबंधन से तीन माह के अंदर रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं। बोर्ड अगली सुनवाई 27 अगस्त को करेगा।
बांदा कताई मिल का मामला कई वर्षों से बाइफर में चल रहा है। दो सदस्यीय बेंच इसकी सुनवाई कर रही है। कताई मिल मजदूर मोर्चा इसमें पार्टी है। मोर्चा अध्यक्ष राम प्रवेश यादव ने बताया कि बाइफर ने कंपनी के सामान की बिक्री मामले की जांच के आदेश पिछले वर्ष 14 अक्तूबर को दिए थे। कंपनी के वकील ने कहा कि मामले की जांच रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है।
उधर, कताई मिल मजदूर मोर्चा प्रतिनिधि ने कहा कि मजदूरों को अब तक बकाया भुगतान नहीं किया गया है। वीआरएस के नाम पर कुछ मजदूरों कोे छंटनी मुआवजा का भुगतान किया गया है। उधर, मुंबई पोर्ट ट्रस्ट ने भी बांदा कताई मिल पर अपनी छह करोड़ की बकाएदारी का दावा बाइफर में ठोंक दिया है।
सभी पक्षों को सुनने के बाद बेंच ने आदेश दिया है कि एमएआईडीबीआई के मुख्य अधिकारी के समक्ष पुनरीक्षित एमडीआरएस जमा किया जाए ताकि वह जांच कर सकें और अगली सुनवाई के पूर्व इसे बेंच के समक्ष दाखिल कर सकें। बाइफर बेंच के सदस्य जेपी दुआ और एससी सिन्हा ने अपने आदेश में कहा है कि इस मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी।