ग्राम पंचायतों में विकास की बागडोर संभालने वाले पंचायत सचिवों की कमी से ग्राम विकास संबंधी योजनाएं परवान नहीं चढ़ पा रहीं। कई सचिवों के पास आठ से दस ग्राम पंचायतों का प्रभार है।
जिले की 437 ग्राम पंचायतों में 48 ग्राम पंचायत अधिकारी व 45 ग्राम विकास अधिकारी सचिव पद पर तैनात हैं। पंचायती राज और विकास विभाग के समन्वय में कमी से सचिवों को ग्राम पंचायतों का बंटवारा समान रूप से नहीं हो पा रहा। खंड विकास अधिकारियों को अपने ब्लाक में सचिवों को मनमाफिक ग्राम पंचायतें आवंटित करने का अधिकार है।
अधिकांश ग्राम पंचायत अधिकारियों के पास तीन से चार ग्राम पंचायतों का प्रभार है। ग्राम विकास अधिकारियों को पांच से 10 ग्राम पंचायतों का सचिव नियुक्त किया गया है। इस असंतुलन के चलते तमाम ग्राम पंचायतों में विकास कार्य बाधित हो रहे हैं। उधर, जुलाई 2014 को 18 ग्राम विकास अधिकारियों के तबादले पर अभी तक पूरी तरह अमल नहीं हुआ।
11 ग्राम विकास अधिकारी अभी भी अपने पुराने क्षेत्र में काबिज हैं। तिंदवारी व नरैनी ब्लाक में कुछ चहेते वीडीओ को सबसे अधिक आबादी वाले गांवों का प्रभार दिया गया है। यह तबादले के बाद अभी तक रिलीव नहीं हुए। यही हाल सहायक खंड विकास अधिकारी (पंचायत) का है।
बड़ोखर, तिंदवारी, बबेरू और कमासिन के अलावा बाकी ब्लाकों में यह पद खाली हैं। उधर, खंड विकास अधिकारी ओपी शुक्ला का कहना है कि अनुभवी पंचायत सचिवों को क्षमता के मुताबिक अधिक गांव आवंटित किए जाते हैं।