The purpose of the Majlis to convey the education of Islam
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बांदा। मोहर्रम और मजलिसों का मकसद लोगों को इस्लाम की हकीकी तालीम से आगाह कराना है, ताकि दिलों में एहतरामे रसूल पैदा करना है। यह बात रविवार (12 मोहर्रम) को पूर्वी कोठी स्थित शिया इमामबाड़े में मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना इमरान रजा गदीरी ने कही।
शहीदाने कर्बला की शहादत के तीसरे दिन (तीजा) मनाने की परंपरा है। रविवार को तीजा था। अनुयायियों ने शहीदाने कर्बला के नाम पर इमामबाड़ों में फातेहाख्वानी कराई। कुछ देर ढोल ताशे बजे। उधर, पूर्वी कोठी और अलीगंज आदि में स्थित शिया इमाम बारगाहों में मजलिसों का सिलसिला चलता रहा।
मौलाना गदीरी ने कहा कि 10 मोहर्रम को पैगंबरे इस्लाम के नवासे और बच्चों और साथियों को तीन दिन तक भूखा प्यास रखने के बाद शहीद कर दिया गया। मजलिस में अंजुमने अब्बासिया ने नौहा ख्वानी की और सीनाजनी के साथ मातम किया।