बांदा। जिले में सूखे की स्थिति ने पशुओं के लिए चारे
का संकट पैदा कर दिया है। बारिश न होने से हरा चारा जहरीला हो रहा है। इसे
खाकर पशुओं की मौत हो रही है। महीने भर में जिले में 200 से ज्यादा मवेशी
मर चुके हैं। पशु चिकित्सा विभाग ने पशु पालकों को विषाक्त हो रही सूखी की
चरी न खिलाने की सलाह दी है।
पिछले 15 दिन से स्थिति और विकराल हो
गई है। पशु चिकित्सा विभाग के मुताबिक करीब 200 मवेशी मर चुके हैं। इनमें
कुछ जंगली जानवर भी शामिल हैं। सबसे ज्यादा संकट उन ब्लाकों में है जहां
नहरों से सिंचाई की सुविधा नहीं है। जसपुरा, तिंदवारी व कमासिन ब्लाक में
मवेशियों के मरने की संख्या में इजाफा हो रहा है।
पशु चिकित्सा
विभाग का कहना है कि पानी की कमी से चारा में साइनाइट (विषाक्त) पैदा हो
रहा है। इसके खाते ही पशु की मौत हो जाती है। पशुओं को सूखे में बोई गई चरी
न खिलाएं और ताजा पानी पिलाएं। साफ सुथरी जगह पर बांधे। मवेशी को फूड
प्वाइजनिंग होने तथा इससे बचाने के लिए सोडियम थायो सल्फेट की 50 ग्राम
मात्रा सुबह व शाम पशु को खिलाएं।
इनके मवेशी हुए फूड प्वाइजनिंग के शिकार मवेशी
1- गुमानगंज (नरैनी) निवासी राजू यादव की दो भैंस और एक पड़वा।
2- माखनपुर (कालिंजर) के मुन्नीलाल की एक भैंस।
3- स्योढ़ा (गिरवां) में रामलोचन की भैंस व गाय।
4- बरईमानपुर (गिरवां) में शिवकुमार की भैंस।
5- जरर (नरैनी) में दलित शुकवा की एक भैंस।
6- सिंधनकलां (जसपुरा) में सात और धौसड़ (तिंदवारी) गांव में नौ गाय व भैंस।