परेड में भाग लेती हुई हथिनी वत्सला।
- फोटो : लहचूरा बांध के पांच फाटक खोलकर निकाला जा रहा पानी। संवाद
करतल (बांदा)। दुनिया की सबसे उम्रदराज हथिनी वत्सला की मंगलवार को पन्ना टाइगर रिजर्व मौत हो गई। वत्सला को टाइगर रिजर्व की दादी कहा जाता था। 103 वर्ष की वत्सला का नाम गिनीज बुक में आते-आते रह गया। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव ने एक्स पर अलविदा वत्सला लिखा है।
टाइगर रिजर्व के वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता ने बताया कि उम्रदराज होने के कारण वह उठ-बैठ नहीं पाती थी। आंखों से भी नहीं दिखाई देता था। कई बार हाथियों ने उस पर हमला कर घायल कर दिया था। बताया कि केरल के नीलाबुर फॉरेस्ट डिवीजिन में पली-बढ़ी हथिनी वत्सला को 1971 में मध्यप्रदेश के होशंगाबाद लाया गया था। उस समय उसकी उम्र 50 वर्ष थी। वत्सला को 1993 में पन्ना टाइगर रिजर्व लाया गया था।