बांदा। सावन शुरू हो चुका है लेकिन बुंदेलखंड की धरती अब भी मेघों के इंतजार में है। खेतों में हरियाली की जगह दरारों की चिंता गहरी होती जा रही है।
चित्रकूटधाम मंडल के बांदा, चित्रकूट, महोबा और हमीरपुर में 30 जुलाई तक औसतन सिर्फ 236 मिमी बारिश हुई। वहीं, पिछले वर्ष इसी अवधि में औसत 547 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी। यानी इस बार बारिश में 311 मिमी (करीब 57 फीसदी) की कमी है।
बारिश की कमी का सीधा असर वर्षा आधारित खरीफ खेती पर पड़ रहा है। धान की बेड़ सूखने लगी हैं, तिल, उड़द, अरहर और ज्वार जैसी फसलों की बोआई प्रभावित है और किसान अच्छी बारिश की उम्मीद में आसमान की ओर टकटकी लगाए हैं।
मंडल में सबसे ज्यादा बारिश की कमी महोबा और बांदा में दर्ज की गई है। महोबा में पिछले वर्ष औसतन 650 मिमी के मुकाबले इस बार केवल 156 मिमी बारिश हुई जबकि बांदा में 615 मिमी के मुकाबले 220 मिमी वर्षा दर्ज की गई।
चित्रकूट में 253 मिमी के मुकाबले 186 मिमी और हमीरपुर में औसतन 670 मिमी के मुकाबले 383 मिमी बारिश हुई है। वर्षा की कमी के कारण खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बन पा रही है। कई स्थानों पर धान की रोपाई अधूरी है, जबकि बोई गई फसलों की बढ़वार भी प्रभावित हो रही है। सिंचाई के सीमित संसाधनों वाले किसानों की चिंता सबसे अधिक बढ़ी है।
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अगस्त की बारिश पर टिकी उम्मीद
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि खरीफ की फसलों के लिए अगस्त का पहला पखवाड़ा बेहद महत्वपूर्ण रहेगा। यदि इस दौरान अच्छी बारिश नहीं हुई तो उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। कृषि एवं मौसम विज्ञानी डॉ. दिनेश शाहा के अनुसार इस वर्ष अलनीनो के प्रभाव से बारिश का वितरण असमान है। ऐसे में जिन किसानों ने धान की बेड़ तैयार कर ली है, उन्हें सिंचाई की वैकल्पिक व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत है, क्योंकि आने वाले दिनों में भी मौसम का मिजाज पूरी तरह सामान्य रहने के संकेत नहीं हैं।
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बारिश का तुलनात्मक लेखा-जोखा (30 जुलाई तक)
जनपद
2025 (मिमी)
2026 (मिमी) कमी
बांदा
615
220
64 प्रतिशत
चित्रकूट
253
186
26 प्रतिशत
महोबा
650
156
76 प्रतिशत
हमीरपुर
670
383
43 प्रतिशत
मंडल का औसत
547
236 57 प्रतिशत
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धान की बेड़ पर सबसे ज्यादा मार
बारिश की कमी का सबसे बड़ा असर धान की नर्सरी पर दिख रहा है। पर्याप्त नमी नहीं मिलने से कई जगह बेड़ सूखने लगी हैं। जिन किसानों ने किसी तरह नर्सरी तैयार कर ली है वे डीजल पंप से सिंचाई कर उसे बचाने की कोशिश कर रहे हैं। इससे खेती की लागत भी बढ़ रही है। धान के साथ-साथ तिल, उड़द, मूंग, अरहर, ज्वार और बाजरा की बुवाई भी प्रभावित हुई है। कृषि विभाग के अनुसार यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो उत्पादन के साथ किसानों की आय पर भी असर पड़ सकता है।
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इस वर्ष अल नीनो का प्रभाव है। बारिश का वितरण सामान्य नहीं रहेगा। जिन किसानों ने धान की बेड़ तैयार कर ली है, वे सिंचाई की वैकल्पिक व्यवस्था रखें। बिना पानी के धान की खेती में नुकसान की आशंका अधिक है।
-डॉ. दिनेश शाहा, कृषि एवं मौसम विज्ञानी, कृषि विश्वविद्यालय, बांदा