The level of education kept falling even after the formation of the commission
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बांदा। सरकारों ने शिक्षा आयोगों का गठन किया, लेकिन शिक्षा का स्तर लगातार गिरता रहा। शिक्षा रूपी द्रौपदी का चीर हरण देश का नौकरशाह दु:शासन कर रहा है। शिक्षक संगठन और उसके नेता पांडव की भूमिका में हैं। कर्ण की भूमिका सत्ता के अंधभक्त हैं। यह चीर हरण नहीं रोका गया तो शिक्षा का महाविनाश निश्चित है।
यह बात उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय महामंत्री लालमणि द्विवेदी ने शनिवार को यहां डीएवी इंटर कॉलेज में मंडलीय सम्मेलन/शैक्षिक विचार गोष्ठी संबोधित करते हुए कही। कहा कि शिक्षकों का एक बड़ा वर्ग है। उसकी ताकत बहुत बड़ी है। देश की आने वाली पीढ़ी उसी के हाथों में है। हजारों साल के कचरे को 20 वर्ष में सिर्फ शिक्षक ही साफ कर सकता है।
डॉ. ओमकार चौरसिया (जेएन कॉलेज) ने कहा कि देश में लगातार शिक्षा का निजीकरण हो रहा है। शिक्षा और शिक्षकों के अस्तित्व में संकट मंडरा रहा है। ऑनलाइन शिक्षा को तो बढ़ावा दिया जा रहा है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी कोई व्यवस्था नहीं की जा रही। महिला डिग्री कॉलेज प्रवक्ता डॉ. सबीहा रहमानी ने कहा कि माध्यमिक के साथ उच्च शिक्षा में भी 30 से 50 फीसदी पद खाली हैं। अध्यापकों की पेंशन छीन ली गई।
संघ के प्रांतीय मंत्री केदार वर्मा ने शिक्षक पदों में की जा रही कटौती को कुठाराघात बताया। अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य डॉ. रामभरत सिंह तोमर (राजीव गांधी कॉलेज) ने कहा कि मौजूदा स्थितियों पर समस्त शिक्षक संगठनों को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए।
सम्मेलन को डीआईओएस विनोद सिंह, संयोजक डॉ. आनंद कुमार ने भी संबोधित किया। संचालन जानकी शरण शुक्ला ने किया। संघ जिलाध्यक्ष गणेश सिंह पटेल (बांदा), रामनरेश (चित्रकूट), कपिल देव तिवारी (हमीरपुर), ओमकार त्रिपाठी (महोबा) आदि ने भी संबोधित किया। चारों जनपदों के बड़ी संख्या में माध्यमिक शिक्षक शामिल रहे। जिला मंत्री मो. बाकर ने सभी का आभार जताया।