बांदा। अपनों से ठुकराये और वृद्धाश्रम में पनाह पाए 74 वर्षीय वृद्ध श्याम श्रीवास्तव का ‘दिल’ रेडक्रास सोसायटी के सहयोग से फिर पहले की तरह धड़कने लगा। कानपुर में हार्ट सर्जरी/पेसमेकर लगाने पर होने वाला 64 हजार रुपया खर्च रेडक्रास सोसायटी ने वहन किया। सर्जरी होने के बाद वृद्ध को छुट्टी दे दी गई।
शहर के कटरा निवासी श्याम श्रीवास्तव इन दिनों वृद्धाश्रम में दिन गुजार रहे हैं। पिछले माह 7 नवंबर को कोरोना संक्रमित होने पर उन्हें मेडिकल कालेज के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया। इसी दौरान डाक्टरों को उनकी नलिकाओं में ब्लाकेज की जानकारी हुई। मेडिकल कालेज प्रिंसिपल डॉ. मुकेश कुमार यादव के प्रयासों से कानपुर के एलपीएस इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी में रियायती शुल्क 64 हजार रुपये में सर्जरी की गई। यह राशि बांदा की रेडक्रास सोसायटी ने अदा की, जबकि आमतौर पर इसका खर्च एक लाख रुपये है।
डीएम आनंद कुमार सिंह की पहल पर रेडक्रास सोसायटी ने 28 नवंबर को 64,478 रुपये का बैंक चेक कॉर्डियोलॉजी को भेज दिया। कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद 3 दिसंबर को श्याम श्रीवास्तव के हृदय में पेसमेकर लगा दिया गया। सोमवार को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वह वृद्धाश्रम संस्था कर्मी के साथ वापस आ गए। वह पूरी तरह स्वस्थ बताए जा रहे हैं।
बेटी की शादी के बाद हो गए अनाथ
नरैनी रोड स्थित वृद्धाश्रम के प्रबंधक श्याम किशोर द्विवेदी ने बताया कि श्याम श्रीवास्तव वर्ष 2018 से वृद्धाश्रम में हैं। इसके पूर्व वह स्टेशन पर चाय-गुटका बेचकर गुजारा करते थे। उन्होंने बताया कि उनके एक पुत्री है। वर्ष 2017 में उसकी लखनऊ में शादी हो गई। इसके बाद वह अकेले पड़ गए। परिवार के अन्य लोगों का भी साथ नहीं मिला।