जिला अस्पताल के डाक्टरों की अब मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। अब वह अपनी मर्जी से मरीजों को रेफर नहीं कर सकेंगे। उन्हें मरीज और तीमारदार को बताना होगा कि अस्पताल में ऐसी कौन सी सुविधा नहीं थी जिसकी वजह से मरीज को रेफर किया। शासन ने मुख्य चिकित्साधिकारी को पत्र भेजकर सरकारी अस्पतालों में इसके लिए अलग रजिस्टर रखने के निर्देश दिए हैं।
सरकारी अस्पतालों में मामूली बीमारी बता कर सरकारी अस्पताल के चिकित्सक तत्काल मरीज को रेफर कर देते हैं। सीएचसी और पीएचसी पर डाक्टर मरीजों को भर्ती करके परेशानी से बचने के लिए दो घंटे तक रखते हैं। इसके बाद जिला अस्पताल रेफर कर देते हैं।
सीएमओ को भेजे गए पत्र में कहा है कि जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में रेफर किए जाने वाले मरीजों के लिए अलग से रजिस्टर रखा जाए। इसमें भर्ती होने से लेकर उपचार, रेफर या डिस्चार्ज करने तक का इस रजिस्टर में पूरा ब्योरा दर्ज किया जाएगा।
सीएमओ डा.एबी कटियार ने बताया कि शासन के निर्देश पर जिला व महिला अस्पताल में रजिस्टर रखने को कहा गया है। मरीज को रेफर करने के पहले चिकित्सक बताएंगे कि किन कारणों से रेफर किया गया है। ऐसा न करने वाले चिकित्सकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।