बांदा। मृत्युदंड की सजा पाया जेई विचारण के दौरान जेल में वाल पेंटिंग किया करता था। इधर, कुछ दिनों से उसने यह करना छोड़ दिया था। सीबीआई ने उसे वर्ष 2020 में गिरफ्तार किया था, तब से वह बांदा जेल में निरुद्ध था। अब वह और उसकी पत्नी बांदा जेल में ही अपने दिन गिनेंगे।
सीबीआई की टीम ने विवेचना के दौरान कुल सात मुकदमे दर्ज कराए थे। जिसमें से सिर्फ एक मामले में उसे फांसी की सजा हुई है। शेष छह मामले अभी विचाराधीन हैं। मुकदमों के विचाराधीन होने की वजह से उसे नैनी जेल नहीं भेजा जाएगा। इसी तरह से उसकी पत्नी दुर्गावती भी नारी निकेतन लखनऊ नहीं भेजा जाएगा। कारागार नियमावली में है कि चूंकि उसका पति मंडल कारागार में बंद है। सजा पाने वाले का पति या कोई सगा संबंधी यदि जेल में होता है तो ऐसी स्थिति में महिला कैदी को भी उसी जेल में निरुद्ध रखने का प्रावधान है।
छह से ज्यादा मामले विचाराधीन होने पर जेई को नैनी जेल नहीं भेजा जाएगा । इसी तरह पति के बांदा में बंद होने के चलते उसकी पत्नी भी नारी बंदी लखनऊ नहीं भेजी जाएगी। जेलर आलोक कुमार ने बताया कि फांसी की सजा पाए दंपती मंडल कारागार में ही बंद रहेंगे। जेई पर छह और मामले विचाराधीन हैं।