बांदा। जिलाधिकारी सुरेश कुमार ने चेक देने में राजस्व विभाग की कोई गड़बड़ी नहीं बताई। उन्होंने कहा कि किसानों को गलतफहमी हुई है। इतनी कम रकम उन्हें कृषि निवेश अनुदान के रूप में नहीं दी गई, बल्कि यह पूर्व में दी जा चुकी सहायता राशि के अनुसार अंतर धनराशि दी दी गई है।
किसानों के प्रदर्शन और मीडिया में छपी खबरों के बाद मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में डीएम सुरेश कुमार ने मीडिया से बातचीत की। कहा कि शासन के आदेश पर असिंचित क्षेत्रफल वाले छोटे किसानों को 4500 रुपये और सिंचित क्षेत्रों में 9000 रुपये प्रति हेक्टेअर की दर से राहत राशि पूर्व में बांटी गई थी।
बाद में शासन ने इसे बढ़ाकर क्रमश: 6800 व 13,500 रुपये कर दिया। उसी का अंतर निकालकर नए शासनादेश के मुताबिक शेष धनराशि को अंतर धनराशि के रूप में चेक के माध्यम से दिया गया है। ओला और अतिवृष्टि से पीड़ित किसी भी किसान को 1500 रुपये से कम नहीं दिया गया। डीएम ने किसानों को अंतर धनराशि के बारे में समझाने के लिए कई उदाहरण भी दिए।
डीएम ने बांदा में घास की रोटी खाने की खबरों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कुछ लोगों द्वारा यह प्रायोजित प्रयास है। उन्होंने कहा कि जिले मेें किसी की मौत भूख से नहीं होगी। मुख्यमंत्री के आदेश पर जिले में ऐसे 2320 परिवारों को चिह्नित किया जा चुका है।
इनमें 151 परिवारों 35-35 किलो राशन दिया गया है। डीएम ने किसानों से कहा कि किसी चेक में त्रुटि हो गई हो तो संबंधित एसडीएम या तहसीलदार से मिलकर दुरुस्त करा लें। इसके बाद भी कोई दिक्कत आए तो एडीएम या डीएम को अवगत कराएं। पत्रकार वार्ता के दौरान सिटी मजिस्ट्रेट आरके श्रीवास्तव भी मौजूद रहे।