Sudama-Krishna's friendship is described in the story
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बबेरू/गिरवां। सराफा गली में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन कथा वाचक पंडित अभिषेक कृष्ण अवस्थी ने सुदामा चरित्र की कथा सुनाई। कहा कि मित्रता हो तो सुदामा और श्रीकृष्ण जैसी। सुदामा जब श्रीकृष्ण से मिलने के लिए द्वारिकापुरी गए तो भगवान उनसे मिलने के लिए नंगे पांव दौड़े चले आए। सुदामा को गले लगा लिया। राजमहल में ले जाकर उनके पैर पखारे। बिना मांगे ही दो मुट्ठी चावल खाकर सुदामा को दो लोक का राज्य दे दिया। परीक्षित केसर देवी, अमित, कामता प्रसाद सोनी, मन्नू, रामदीन, प्रदीप कुमार, अनिकेत आदि मौजूद रहे।
उधर, गिरवां क्षेत्र के पतरहा गांव में पूर्व प्रधान प्रेम स्वरूप द्विवेदी के आवास में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन पंडित विनोद शुक्ला ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम व श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की कथा सुनाई। कहा कि राम और कृष्ण में कोई अंतर नहीं है।
श्रद्धापूर्वक भगवान को याद करने से साक्षात जगदीश्वर प्रकट होते हैं। श्रीकृष्ण ने देवकी की कोख से आठवें पुत्र के रूप में जन्म लिया और कंस का वध करके उसके अत्याचारों से लोगों को मुक्ति दिलाई।
परीक्षित संतोष कुमार द्विवेदी, रामरति द्विवेदी, गणेश द्विवेदी, रामशरण पांडेय, प्रवक्ता संतोष अग्निहोत्री, मुनीश्वरनंद महाराज, राकेश शर्मा, स्वामीदीन, परशुराम द्विवेदी, अशोक द्विवेदी, शाहिद भी मौजूद रहे। कथा 26 नवंबर तक चलेगी। 27 नवंबर को विशाल भंडारा होगा।