मिशनरीज स्कूलों के टीचर्स को झांसी डायोसिस से आए फादर फ्रेडरिक मेडांसा ने शिक्षा प्रणाली के गुर सिखाए। कहा कि टीचर को ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना से टीचिंग करते हुए बच्चों का चौमुखी विकास करना चाहिए।
रविवार को सेंटमैरीज सीनियर सेकेंड्री स्कूल (ज्योति नगर) में सीबीएसई स्कूलों के टीचर्स का सेमिनार आयोजित हुआ। उन्हें संबोधित करते हुए फादर फ्रेडरिक ने कहा टीचर्स को समर्पण भावना से टीचिंग करनी चाहिए। पुरानी पारंपरिक शिक्षा प्रणाली के साथ नई रचनात्मक शिक्षा प्रणाली भी अपनानी चाहिए।
टीचर के अंत:मन में वसुधैव कुटुंबकम और प्यार की भावना और आशावादी विचारधारा होनी चाहिए। विचारों में परिपक्वता बनाए रखना, अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाना, स्वयं को आधुनिक विचारों से सुसज्जित रखने की भी टीचर्स को सलाह दी। उन्होंने कहा कि रचनात्मकता मशीनीकरण से भी सुपर होती है। इससे विद्यालय का वातावरण स्वस्थ्य बना रहता है।
बच्चे के हर पहलू को समझना, निष्पक्ष होना, मित्रवत व्यवहार और आत्मविश्वास बनाए रखना, क्रोध व शोषण रहित होना एक अच्छे अध्यापक के गुण और पहचान हैं। इसके पूर्व फादर दीप जलाकर और यीशु वंदना से सेमिनार की शुरूआत की।
इस मौके पर फादर रोनाल्ड डिसूजा (सेंटमैरीज, बांदा), फादर मैलविन (सेंट थॉमस, कर्वी), सिस्टर बेबी रोज (सुपीरियर शांतिधाम, अतर्रा), सिस्टर ग्रेसी (वाइस प्रिंसपल सेंटमैरीज, बांदा) और फादर संतोष आदि उपस्थित रहे।