होटल, ढाबों और बाजार में भले ही इस महंगाई में 60 से 100 रुपये की थाली और 40 रुपये लीटर दूध हो, पर बाल विकास पुष्टाहार विभाग में आज भी मार्निंग स्नैक के लिए ढाई रुपये और पौष्टिक भोजन में सिर्फ साढ़े तीन रुपये ही खर्च किए जा रहे हैं।
ऐसे में धात्री व गर्भवती महिलाओं को दिए जा रहे पोषाहार की गुणवत्ता कितनी सही होगी, समझा जा सकता है। उधर, कार्यकत्रियों को केंद्रों के लिए समय ही नहीं मिल पाता। उनकी शिकायत है कि कभी बीएलओ की ड्यूटी तो कभी पोलियो व फाइलेरिया की दवा खिलाने में वे व्यस्त रहती हैं।
बाल विकास पुष्टाहार निदेशालय, लखनऊ से जुलाई 2014 में जारी आदेश में 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों पर सुबह मार्निंग स्नैक (स्वल्पाहार) के लिए 2.50 रुपये और दोपहर में हॉटकुक्ड के लिए 3.50 रुपये प्रति बच्चे की दर से बजट दिया जा रहा है।
मार्निंग स्नैक सप्ताह में चार दिन दिए जाने का प्रावधान है जबकि बुधवार और शुक्रवार को दूध, केला, अंडा, लाई-चना व गुड़ व भुना चना देने का आदेश है। 70 ग्राम दलिया, 25 ग्राम चीनी तथा 25 ग्राम दूध तथा खिचड़ी में प्रति बच्चा 60 ग्राम चावल, 30 ग्राम दाल और दो ग्राम बेजीटेबल आयल, 20 ग्राम हरी पत्तेदार सब्जियां होनी चाहिए।
सप्ताह में तीन दिन दलिया और तीन दिन खिचड़ी मिलनी चाहिए। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का कहना है कि इस समय 40 रुपये लीटर दूध है व 80 रुपये किलो मूंग की दाल। चीनी भी 30 से 40 रुपये किलो है। विभाग से हाटकुक्ड बनाने के लिए चूल्हा व सिलेंडर की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में शासनदेश का अनुपालन कर पाना मुमकिन नहीं है।
यह भी बताया कि हर माह कभी आधार कार्ड में, कभी वोटर आईकार्ड में तो कभी फाइलेरिया व पोलियो की दवा पिलाने में उन लोगों की ड्यूटी लगी रहती है। जैसे-तैसे केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। ऊपर से विभागीय अधिकारियों की फटकार व दबाव झेलना पड़ता है। वेतन भी नाममात्र का दिया जा रहा है। ऐसे में किसी तरह नौकरी चल रही है।
आंगनबाड़ी कार्यकत्री बोलीं, जैसा बजट वैसा दिया जा रहा भोजन
आंगनबाड़ी कार्यकत्री संघ अध्यक्ष नीलम वर्मा ने कहा कि कार्यकत्री की नौकरी अब गले की फांस बन गई है। मर्दननाका वार्ड-7 की आंगनबाड़ी कार्यकत्री नुसरतजहां कहती हैं कि उनके केंद्र में 64 बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें 40-50 बच्चे रोज आते हैं। दलिया व खिचड़ी वह घर के चूल्हे से बनाकर दे रही हैं।
4200 रुपये में एक माह तक लाई, चना, फल, अंडा, पोहा आदि देना टेढ़ी खीर है। मटौंध की कार्यकत्री सीमा शिवहरे ने बताया कि जितना बजट मिलता है उसी हिसाब से बच्चों को पौष्टिक भोजन दिया जाता है।
नगर पंचायत चेयरमैन बिंदादीन पाल की बहू आंगनबाड़ी कार्यकत्री माधुरी पाल ने बताया कि आधिकारी आए दिन जांच करते हैं और फटकार लगाते हैं जबकि यह बात वह भी जानते हैं कि इतने पैसे में सभी बच्चों को पौष्टिक भोजन मेन्यू के मुताबिक दे पाना संभव नहीं है।