जिला पंचायत की तहबाजारी पर्ची।
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बांदा। जिला पंचायत की तहबाजारी वसूली में अंधेरगर्दी मची है। घोटाले लुकेछिपे नहीं बल्कि दस्तावेजी हो रहे हैं। इसकी बानगी जिला पंचायत द्वारा खनिज और तहबाजारी के लिए जारी की गई रसीदें हैं। गड़बड़ियों से भरपूर इन पर्चियों से रोजाना लाखों रुपये तहबाजारी वसूली जा रही है।
जिला पंचायत की तहबाजारी/खनिज रसीद में उत्तर प्रदेश सरकार का मोनोग्राम और सरकारी गजट की संख्या भी दर्ज है। बुक नंबर और रसीद नंबर अंकित हैं। गिट्टी, मौरंग, बालू, पत्थर आदि के लिए भारी वाहन (ट्रक 10 चक्का या अधिक) के लिए 200 रुपये प्रति फेरा की दर प्रिंट है, लेकिन रसीद में न तो नीलामी वर्ष है न रसीद देने वाले के हस्ताक्षर।
ट्रक चालकों ने बताया कि 200 रुपये प्रिंट वाली रसीद में उनसे 300 रुपये वसूले जाते हैं। वसूली करने वाले बैरियर लगाकर दबंगई के साथ वसूलते हैं। यह भी आशंका जताई गई है कि डुप्लीकेट पर्चियां छपाई गई हैं।
आरटीआई कार्यकर्ता आशीष सागर दीक्षित का कहना है कि अवैध खनन से लेकर तहबाजारी घपले तक में साझी लूट चल रही है। इसमें सत्तारूढ़ दल के माननीयों से लेकर सियासी दबंग और माफिया शामिल हैं। सबसे ज्यादा नुकसान किसानों और खेती को पहुंचाया जा रहा है।
जिला पंचायत में भी सत्तारूढ़ दल का कब्जा है। उधर, इस बारे में जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी एलएन खरे का कहना है कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। जांच कराई जाएगी। गड़बड़ी पाए जाने पर ठेका निरस्त भी किया जा सकता है।