जेल में बंद भाई से न मिल पाने से हताश बहनें गेट पर बैठ गईं।
- फोटो : BANDA
बांदा। जेल में बंदियों की कलाई पर बहनें राखी नहीं बांध सकीं। कोरोना संक्रमण इसमें आड़े आ गया। जेल प्रशासन ने गेट पर ही राखियां जमा कराकर बंदियों तक पहुंचाया। जेल प्रशासन ने यह कार्य दो दिन पहले यानी 1 अगस्त को ही कर लिया। सोमवार को रक्षाबंधन के दिन पहुंचीं महिलाओं को बैरंग लौटा दिया गया। कुछ महिलाएं देर तक जेल गेट पर भाई को राखी बांधने की उम्मीद लगाए बैठी रहीं, लेकिन उनकी तमन्ना पूरी नहीं हो सकी।
गेट पर बैठी रही चित्रकूट से आई बहन
बांदा। हत्या के आरोपी बंदी दामोदर की बहन सोनू ने बताया कि रक्षाबंधन पर वह भाई को राखी बांधने सिंहपुर (चित्रकूट) से आई है। उसे 1 अगस्त तक राखी भेजने की जानकारी नहीं थी।
इतनी दूर से किराया भाड़ा खर्च करने के बाद उसका आना निरर्थक रहा। भाई के दीदार नहीं कर सकी। राखी भी नहीं दे पाई। वह देर तक जेल गेट के सामने बैठी रही। अंतत: मायूस होकर लौट गई।