समायोजन निरस्त होने से आहत शिक्षामित्रों ने अपने आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए बुधवार को स्कूलों में ड्यूटी के बजाए बीआरसी में हाजिरी दी। जिले के 103 स्कूलों में शिक्षामित्र प्रभारी प्रधानाध्यापक हैं। इस बहिष्कार से जिले के 70 स्कूलों के ताले तक नहीं खुले।
स्कूल आए बच्चे घंटों इंतजार के बाद लौट गए। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि विकल्प के तौर पर ऐसे स्कूलों में एक-एक अस्थाई टीचर की व्यवस्था की गई है। हाईकोर्ट के आदेश से जिले के 1533 शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द हो गया है।
1395 प्राथमिक स्कूलों में 103 ऐसे हैं, जिनमें समायोजित शिक्षामित्र ही इंचार्ज प्रधानाध्यापक हैं। बुधवार को शिक्षामित्रों ने स्कूल न जाकर बीआरसी दफ्तरों में हाजिरी दी।
ऐसे में करीब 70 स्कूलों में तालाबंदी रही। बड़ोखर ब्लाक में 11, नरैनी में 9, महुआ में 7, जसपुरा में 14, तिंदवारी में 10, बिसंडा में 12, कमासिन में 15 और बबेरू ब्लाक में 20 प्राथमिक विद्यालय शिक्षामित्रों के हवाले हैं। साथ ही बांदा नगर क्षेत्र में अलीगंज, मर्दननाका, क्योटरा भाग-1, छोटी बाजार व कैलाशपुरी भाग प्राथमिक स्कूल में शिक्षामित्र प्रभारी प्रधानाध्यापक हैं।
हरतालिका तीज की वजह से महिला शिक्षामित्रों वाले विद्यालयों में छुट्टी रही। अन्य स्कूलों में अघोषित अवकाश रहा। नगर क्षेत्र के शिक्षामित्र डायट में और ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षामित्रों ने ब्लाक संशाधन केंद्र पर हाजिरी दी। बाद में खंड शिक्षा अधिकारी ने बहिष्कार करने वाले शिक्षामित्रों को समझा-बुझाकर ताले खुलवाए और पढ़ाई का माहौल बनाने की कोशिश की, लेकिन 70 प्राथमिक स्कूलों में ताला बंदी रही।
ड्यूटी करेंगे तो मिलेगा वेतन
समायोजित शिक्षामित्र ड्यूटी करेंगे तभी वेतन मिलेगा। उन्हें शिक्षामित्र या सहायक अध्यापक में कौन सा वेतन मिलेगा, यह शासन तय करेगा। फिलहाल जिसे जो वेतन मिल रहा है, वह मिलता रहेगा।
शिक्षामित्रों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है। नहीं माने तो खामियाजा भुगतेंगे। इनके बहिष्कार की स्थिति में आसपास के स्कूल से एक-एक टीचर को लगाया गया है। पठन-पाठन का कार्य किसी भी हाल में प्रभावित नहीं होने पाएगा।-ओमप्रकाश त्रिपाठी, बेसिक शिक्षा अधिकारी, बांदा