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कर्ज अदायगी के लिए बेटे के साथ परदेस जाएगी संध्या की मां

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संध्या की मां सीता अपने इकलौते पुत्र राहुल शुक्ला के साथ। - फोटो : BANDA
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फो बेटी का जीएनएम (जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी) कोर्स में दाखिला हो जाने के बाद मृतक किसान महेश शुक्ला की विधवा सीता अब अपने पति के कर्ज की अदायगी के लिए मजदूरी करेगी। बेटे के साथ परदेस जाकर काम करेगी। बेटा गुरुग्राम में एक प्राइवेट कंपनी में मामूली दिहाड़ी पर काम करता है।
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महोखर गांव में मात्र दो बीघा के गरीब काश्तकार महेश ने पांच जुलाई को आग लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उसके ऊपर अपने बाबा रामऔतार द्वारा इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक (अब आर्यावर्त बैंक) से लिए गए 2.58 लाख रुपये कर्ज की एक चौथाई रकम (लगभग 71 हजार रुपये) की देनदारी थी।
उधर, बेटी संध्या मेडिकल पढ़ाई करना चाहती थी। इन्हीं दोनों चिंताओं और तनाव में महेश ने आत्महत्या कर ली। उसकी आत्महत्या के बाद बेटी की मेडिकल पढ़ाई और घरेलू परिस्थितियों को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया।
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इसके बाद मदद के लिए कुछ हाथ बढ़े। इनमें प्रमुख भूमिका बांदा के महिला संगठन चिराग फाउंडेशन ने अदा की। इस संगठन ने सोमवार (15 जुलाई) को बांदा के पैरा मेडिकल कालेज में कुमारी संध्या का जीएनएम में दाखिला करा दिया। फाउंडेशन के सदस्यों ने आपस में मिलकर जुटाई सहयोग राशि से संध्या के कोर्स का खर्च उठाने का जिम्मा लिया है।
उधर, बेटी का दाखिला होने के बाद मां सीता ने राहत महसूस की है, लेकिन अभी अपने पति के बैंक कर्ज की अदायगी का जिम्मा उसके ऊपर है। इसके लिए वह अब मजदूरी करेगी। बैंक के अलावा लगभग 15 हजार रुपये रिश्तेदारों के भी अदा करना हैं।
मां और भाई के परदेस चले जाने पर संध्या बांदा में राजकीय छात्रावास (हॉस्टल) में रहकर जीएनएम की पढ़ाई करेगी। उसका दाखिला कराने वाली संस्था चिराग फाउंडेशन ने उसके हॉस्टल की व्यवस्था का भी जिम्मा लिया है।
मंगलवार को फाउंडेशन की अध्यक्ष डा. शबाना रफीक और प्रबंधक डा. सबीहा रहमानी ने संध्या की उपस्थिति में हॉस्टल के आवेदन की औपचारिकताएं पूरी कराईं। समाज कल्याण अधिकारी जल्द ही आवंटन करेंगे।
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