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सोलह वर्षीय किशोर की दूसरी रिपोर्ट निगेटिव

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क्वारंटीन गांव रजवा डेरा में तैनात पुलिस। - फोटो : BANDA
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बांदा। जिले का तीसरा कोरोना मरीज तीसरे दिन ही निगेटिव हो गया। उसके अलावा पिछले दो दिनों में जांच के लिए भेजे गए 81 सैंपल की भी रिपोर्ट निगेटिव आईं हैं। इनमें उरई से यहां आई जमात के 18 सदस्य और राजकीय मेडिकल कालेज के 10 चिकित्सक भी शामिल हैं। इन्हें मिलाकर अब तक यहां 301 लोगों को जांच में निगेटिव रिपोर्ट की क्लीनचिट मिल चुकी है। अभी 42 लोगों के नमूने जांच को झांसी भेजे गए हैं। सभी मेडिकल कालेज में भर्ती हैं।
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तिंदवारी क्षेत्र के रजवा डेरा (माचा) गांव का 16 वर्षीय किशोर जिले का तीसरा संक्रमित मरीज है। सोमवार (20 अप्रैल) को आई उसकी पहली रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई थी। इस पर उसके पैतृक गांव को आनन-फानन में सील कर पूरे गांव की आबादी को घरों में क्वारंटीन कर दिया गया है। गांव की सारी सीमाएं सील हैं और पुलिस का पहरा है।
किशोर मजदूर को मेडिकल कालेज के आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है। मेडिकल कालेज प्रशासन ने किशोर मजदूर का दूसरा नमूना 21 अप्रैल को जांच के लिए भेजा था। गुरुवार को आई रिपोर्ट में निगेटिव पाया गया। मंडलायुक्त गौरव दयाल ने बताया कि 20 व 21 अप्रैल को 81 नमूने भेजे गए थे। गुरुवार को इन सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई है।
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इनमें मेडिकल कालेज के 10 चिकित्सक और उरई से बांदा आई जमात के 18 सदस्य भी शामिल हैं। जमाती सदस्यों को कृषि विश्वविद्यालय में क्वारंटीन रखा गया है। निगेटिव रिपोर्ट आने के बाद उन्हें वापस उरई भेजने की तैयारी है। मेडिकल कालेज प्रधानाचार्य डॉ. मुकेश कुमार यादव ने बताया कि गुरुवार को मेडिकल कालेज में कुल 45 मरीज भर्ती थे। इन सभी के नमूने बुधवार को जांच के लिए भेजे गए हैं। अभी रिपोर्ट नहीं आई है। सभी मरीजों की हालत सामान्य है।
301 नमूनों में आ चुकी है निगेटिव रिपोर्ट
बांदा। जिले में अब तक कुल 349 लोगों के सैंपल जांच के लिए भेजे जा चुके हैं। इनमें 301 की रिपोर्ट निगेटिव आई है। 3 पॉजिटिव पाए गए हैं। 45 अभी भर्ती हैं। इनके सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। रिपोर्ट का इंतजार है। गुरुवार को क्वारंटीन वार्ड में पांच लोगों को भर्ती किया गया है। अब तक क्वारंटीन वार्ड से 119 लोग डिस्चार्ज किए जा चुके हैं, जबकि यहां 148 भर्ती किए जा चुके हैं।
पॉजिटिव-निगेटिव का खेल निराला
बांदा। पॉजिटिव से निगेटिव और निगेटिव से पॉजिटिव का अजब हाल है। खास बात यह है कि मरीज में यह उलटफेर चंद दिनों में ही हो जाती है। यहां अब तक पाए गए तीनों पॉजिटिव केसों का यही हाल रहा। बांदा शहर के गूलरनाका निवासी युवक की पहली रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद 3-3 दिन के अंतराल में भेजे गए दूसरे और तीसरे नमूनों में रिपोर्ट निगेटिव आई। उसे मेडिकल कालेज से छुट्टी दे दी गई।
दूसरा पॉजिटिव मामला शिव गांव का है। सबसे बड़ा लगभग 55 वर्षीय शिव गांव निवासी ग्रामीण के साथ चल रहा है। इसकी पहली रिपोर्ट पॉजिटिव आई। तीन दिन बाद दूसरी रिपोर्ट निगेटिव हो गई। दो दिन बाद फिर भेजे गए नमूने में फिर पॉजिटिव पाया गया। चौथे नमूने में फिर निगेटिव हो गया। तीन दिन पूर्व 20 अप्रैल को आई पांचवीं रिपोर्ट भी पॉजिटिव निकली। गुरुवार (23 अप्रैल) को छठवीं बार सैंपल भेजा गया है। इस मरीज को फिलहाल मेडिकल कालेज के आइसोलेशन वार्ड में ही रखा गया है।
अब तीसरे पॉजिटिव किशोर मरीज के साथ भी कुछ ऐसा ही चल रहा है। 16 वर्षीय इस किशोर की 20 अप्रैल को आई पहली रिपोर्ट पॉजिटिव निकली। तीन दिन बाद 23 अप्रैल को आई दूसरी रिपोर्ट में इसे निगेटिव बताया गया है। इस बाबत मेडिकल कालेज प्रधानाचार्य डॉ. मुकेश कुमार यादव का कहना है कि यह बदलाव मरीज की प्रतिरोधक क्षमता (बॉडी रजिस्टेंस) पर निर्भर करता है। जब प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है तो पॉजिटिव हो जाता है और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाने पर निगेटिव स्थिति आ जाती है।
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