बांदा। तीन माह तक दिहाड़ी मजदूरों सहित श्रमिकों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को नि:शुल्क राशन व एक हजार रुपये मासिक भरण पोषण भत्ता मिलेगा। इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी गई है। नगरीय क्षेत्रों में नगर पालिका व गांवों में ग्राम पंचायत ने चिन्हांकन व नाम पता, कार्यस्थल, बैंक एकाउंट नंबर कलेक्शन का काम शुरू कर दिया है।
जनपद स्तर पर आठ सदस्यीय समिति का गठन किया गया है, जिसमें जिलाधिकारी अध्यक्ष, सीडीओ सचिव, एडीएम, कोषाधिकारी, ईओ नगर पालिका, नगर मजिस्ट्रेट, डीएसओ, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी को सदस्य नामित किया गया है। पिछले वर्ष मार्च माह में भी तीन माह तक राशन व भरण पोषण भत्ता दिया गया था। जिले में पात्र परिवारों की संख्या करीब 20 हजार है। उधर, राशन की दुकानों में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत नि:शुल्क अनाज वितरण बृहस्पतिवार से शुरू हो गया। जनपद के ग्राम पंचायत रिसौरा में नरैनी विधायक राजकरण कबीर अभियान का शुभारंभ किया। कहा कि कोरोना काल में गरीबों के लिए बड़ी मदद है। इसके साथ ही कामकाज बंद होने से घर में बैठे चिह्नित जरूरतमंदों को एक हजार रुपये मासिक भरण पोषण भत्ता दिया जाएगा, जिसकी तैयारी शुरू कर दी गई हैं।
जिलापूर्ति अधिकारी राजीव तिवारी ने बताया कि जिले में अंत्योदय और पात्र गृहस्थी राशन कार्डों की संख्या 3 लाख, 63 हजार, 728 है। यूनिटों की संख्या 13 लाख 79 हजार 965 है। प्रत्येक यूनिट पर उपभोक्ता को तीन किलो गेहूं और दो किलो ग्राम चावल निशुल्क दिया जाएगा। अनाज वितरण पॉस मशीन से अंगूठा लगाने पर होगा। जिन लोगों का अंगूठा पॉस मशीन में नहीं लग रहा है, उन्हें मोबाइल पर ओटीपी के आधार पर 31 मार्च को अनाज वितरण होगा। डीएसओ ने कोटेदारों को हिदायत दी कि वह कोरोना गाइडलाइन के मानकों का पालन करें। दुकान में ग्राहकों के हाथ साफ करने के लिए पानी और साबुन रखे। बिना मास्क के किसी को भी अनाज न दें। खुद भी मानकों का पालन करें। डीएसओ ने बताया कि फिरहाल शासन से तीन माह तक निशुल्क राशन वितरण के आदेश है। (संवाद)
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शहरी/ग्रामीण क्षेत्रों में यह होंगे पात्र---
ठिलिया, खोमचा, रेहड़ी, खोखा, पटरी दुकानदार, दिहाड़ी मजदूर, ई-रिक्शा चालक, कुली पल्लेदार, नाई, धोबी, मोची, प्रवासी श्रमिक, हलवाई, दर्जी, मनरेगा मजदूर आदि।
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काम पूरा करने के निर्देश
सहायक विकास अधिकारियों को आदेश दिए गए कि वह 21 मई (शुक्रवार) तक चिन्हांकन का काम पूरा कर लें, जिससे सूची शासन को भेजी जा सके।
-सर्वेश कुमार, डीपीआरओ, बांदा