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डीएम के गोद लिए स्कूल के बच्चों को नहीं आता पहाड़ा

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School children do not come to the school adopted by DM - फोटो : BANDA
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बांदा। कक्षा आठ के बच्चों को राष्ट्रीय ध्वज और अशोक स्तंभ का भी नहीं ज्ञान नहीं है। इसी तरह पहली कक्षा सात तक के बच्चों को पहाड़ा भी नहीं आता। अपने ही गोद लिए गांव के परिषदीय और जूनियर स्कूल में पढ़ाई की यह दुर्दशा देखकर डीएम अनुराग पटेल दंग रह गए। उन्हें यहां दो घंटे रुकना पड़ा। खुद बच्चों की क्लास ली। साथ ही प्रधानाध्यापक और दो सहायक अध्यापकों का वेतन रोक दिया।
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डीएम ने बड़ोखर ब्लॉक के कतरावल गांव को प्रशासन पोषण पाठन अभियान के तहत खुद गोद ले रखा है। बुधवार को वह गांव पहुंचे तो विद्यालय की नब्ज टटोली। हर कक्षा में गिनेचुने बच्चे मिले। अध्यापकों की दलील थी कि अभिलेख न मिलने से नए दाखिले नहीं हो सके। डीएम ने दो दिन में घर-घर जाकर दाखिले के निर्देश दिए। अध्यापक की सीट पर बैठकर डीएम ने बच्चों से सामान्य ज्ञान, गणित इत्यादि के तमाम सवाल पूछे। एक-दो को छोड़कर अधिकांश बच्चे डीएम का मुंह निहारते रह गए।
कक्षा 8वीं के बच्चे कविता के कई शब्दों के मायने नहीं बता सके। उन्हें यह भी नहीं पता था कि देश में कितने केंद्र शासित राज्य हैं और कहां की मुख्यमंत्री महिला है? राष्ट्रीय ध्वज और अशोक स्तंभ क्या है? डीएम ने ब्लैक बोर्ड पर देर तक खुद पढ़ाया। उनके साथ ट्रेनी डिप्टी कलेक्टर कुमारी श्वेता साहू और यदुवेंद्र सिंह भी थे। अपने गोद लिए गांव के स्कूल की चौपट शिक्षा पर डीएम ने प्रधानाध्यापक अंजू याज्ञिक और सहायक अध्यापक अर्चना देवी व राजेश सिंह का वेतन अगले आदेशों तक के लिए रोक दिया। साथ ही एक माह की मोहलत देते हुए खबरदार किया कि इस दौरान पढ़ाई में सुधार न आया तो कड़ी कार्रवाई के लिए तैयार रहें।
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पतौरा में भी पढ़ाई मिली चौपट
बांदा। परिषदीय विद्यालयों में पढ़ाई की दुर्दशा का दूसरा नजारा डीएम अनुराग पटेल को महुआ गांव के पतौरा गांव में मिला। गुरुवार को डीएम ने इस गांव के प्राथमिक विद्यालय का निरीक्षण किया। एक से कक्षा पांच तक के बच्चों से गिनती, पहाड़ा, क ख ग इत्यादि पूछा। कोई बच्चे नहीं बता पाए। एक-दो बच्चे ही हिंदी की पुस्तक पढ़ पाए। डीएम ने प्रधानाध्यापक सुमन और सहायक अध्यापक वंदना व रानी निरंजन तथा शिक्षामित्र टेकूराम से स्पष्टीकरण तलब करते हुए एक माह में शिक्षा की गुणवत्ता सुधार की चेतावनी दी। (संवाद)
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