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Banda News: दरकार साढ़े सात करोड़ रुपये की, मिले सिर्फ डेढ़ करोड़

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बांदा। परिषदीय विद्यालयों के रंग-रोगन, स्टेशनरी सहित अन्य व्यवस्थाओं के लिए करीब साढ़े सात करोड़ की दरकार है। बेसिक शिक्षा विभाग ने इसके लिए शासन को डिमांड भी भेजी थी, लेकिन वहां से सिर्फ डेढ़ करोड़ की धनराशि ही भेजी गई है।
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इसी से ही प्रधानाचार्यों को रंग-रोगन, पेंटिंग और अन्य कार्य कराने होंगे। जनपद में बेसिक शिक्षा विभाग के 1725 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं।
इन विद्यालयों में हर वर्ष पेंटिंग-रंग रोगन आदि के अलावा ऑपरेशन कायाकल्प के तहत कार्य कराए जाते हैं, साथ ही स्टेशनरी खरीद और टीएलएम (शिक्षण अधिगम सामग्री) पर राशि खर्च की जाती है।
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बेसिक शिक्षा विभाग ने इसके लिए शासन में साढ़े सात करोड़ रुपये की डिमांड भेजी थी। इसके सापेक्ष शासन ने करीब 25 प्रतिशत (एक करोड़ 70 लाख रुपये भेजे हैं। कंपोजिट ग्रांट की धनराशि छात्रांकन के आधार पर दी जाती है।
100 छात्र संख्या पर 25 हजार, 250 छात्र संख्या तक 50 हजार रुपये और एक हजार छात्र संख्या पर 75 हजार रुपये की धनराशि विद्यालय प्रबंध समिति के खाते में भेजी जाती है।
शासन से बजट कम आने के कारण किसी विद्यालय में पांच तो किसी में तीन हजार रुपये की राशि भेजी गई है। जनपद में कई ऐसे विद्यालय हैं, जहां रंगाई-पोताई और पेंटिंग की बेहद जरूरत है। लेकिन प्रधानाध्यापक असमंजस की स्थिति में हैं।
उनका कहना है कि भवन की रंगाई पुताई पर कोई भी व्यक्ति दस हजार से नीचे बजट नहीं बनाता। अधिकारियों का दबाव अलग से है। ऐसे में उन्हें अभी जेब से धनराशि खर्च करनी पड़ रही है। जब शेष 75 प्रतिशत कंपोजिट ग्रांट आएगी तब प्रधानाध्यापक दुकानों व ठेकेदारों का कर्ज चुकाएंगे।
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