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बेसमेंट की अवैध खुदाई में वरिष्ठ चिकित्सक पर रिपोर्ट

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डाक्टर द्वारा कराए जा रहे नर्सिंग होम के निर्माण को रोकते डीएम और सिटी मजिस्ट्रेट। - फोटो : BANDA
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बांदा। शहर के सिविल लाइन स्थित अपने आवास/नर्सिंगहोम परिसर में बेसमेंट के लिए जेसीबी से खुदाई करा रहे शहर के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र कुमार गुप्ता पर विकास प्राधिकरण ने कई धाराओं में रिपोर्ट दर्ज करा दी है। पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया है। जेसीबी को कब्जे में ले लिया है। डीएम खुद मौके पर पहुंचे। उनके साथ सिटी मजिस्ट्रेट भी थे।
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रोडवेज बस अड्डे के पास डॉ. नरेंद्र गुप्ता अपने परिसर में बेसमेंट के लिए कई दिनों से जेसीबी से खुदाई करा रहे थे। रविवार को दोपहर डीएम अमित सिंह बंसल मौके पर पहुंच गए। उनके साथ सिटी मजिस्ट्रेट सुरेंद्र सिंह और विकास प्राधिकरण के अभियंता भी थे। डीएम की फौरीतौर पर पूछताछ और जांच में पता चला कि खुदाई मानक के विपरीत कराई जा रही है।
इसी के बाद प्राधिकरण हरकत में आया और प्राधिकरण के अवर अभियंता एसबी त्रिपाठी ने अपनी ओर से शहर कोतवाली में डॉ. नरेंद्र कुमार गुप्ता के विरुद्ध धारा 188, 288 आईपीसी व सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 की धारा 3 व 4 और उत्तर प्रदेश शहरी नियोजन व विकास अधिनियम की धारा 49 के तहत रिपोर्ट दर्ज करा दी।
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दर्ज रिपोर्ट में कहा गया है कि जेसीबी और दो मजदूरों के साथ बेसमेंट की खुदाई प्राधिकरण से मानचित्र स्वीकृत कराए बगैर और मानक के विपरीत कराई जा रही थी। यह भी कहा गया कि इसकी शुरुआत में 24 दिसंबर 2019 को प्राधिकरण ने निर्माण रोकने के लिए डाक्टर की पत्नी इंदिरा गुप्ता के नाम नोटिस जारी किया था।
साथ ही धारा 28(2) के तहत कोतवाली को पत्र भेजा गया था। इसके बाद भी अत्यधिक गहरी खुदाई शुरू कर दी गई। जिससे अगल-बगल की संपत्ति और सरकारी सड़क की क्षति हो सकती है। जन-धन की क्षति संभावित है। बारिश में जलभराव से अत्यंत भयावह स्थिति हो सकती है।
इससे लॉ एंड आर्डर भी प्रभावित हो सकता है। साइड में डा. गुप्ता के भवन के पैसेज का आंशिक भाग टूटकर गिर गया है। सिटी मजिस्ट्रेट सुरेंद्र सिंह ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज करने के बाद अन्य विधिक कार्रवाई की जा रही है। उधर, कोतवाली प्रभारी दिनेश सिंह ने बताया कि नामजद डॉ. नरेंद्र गुप्ता को गिरफ्तार किया गया है। जेसीबी कब्जे में ले ली गई।
जुलाई में ही मानचित्र कर दिया था दाखिल
बांदा। डॉ. नरेंद्र गुप्ता का कहना है कि उन्होंने जुलाई 2019 में बांदा विकास प्राधिकरण में मानचित्र स्वीकृति के लिए दाखिल कर दिया था। साथ ही खनिज विभाग, सदर तहसील और नगर पालिका परिषद से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) भी प्राप्त कर ली थी।
उसी के बाद पिछले वर्ष दिसंबर में यह खुदाई कराई थी। पीडब्ल्यूडी की एनओसी लेने के लिए लगातार प्रयासरत थे। कई महीने पहले ही खुदाई का काम रोक दिया था। अभी उनके परिसर के एक भाग की मिट्टी धंस गई थी। जिसे जेसीबी से हटवा रहे थे।
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